आगरा। जगदीशपुरा में करोड़ों रुपए की जमीन पर कब्जा करने के लिए पुलिस ने एनडीपीएस का जो फर्जी मुकदमा दर्ज किया था उसमें सिर्फ 22 दिन में ही विवेचक ने चार्जशीट लगा दी। पांच पर्चों में ही विवेचना पूरी कर दी गई। हैरानी की बात यह रही कि 14 दिन में फोरेंसिक वैज्ञानिकों ने गांजे का परीक्षण कर रिपोर्ट भी दे दी। जबकि सामान्य मामलों में 40 से 50 दिन लग जाते हैं। इसके लिए भी तीन रिमाइंडर देने पड़ते हैं। केस डायरी में पूरे तरीके से पुलिस की करतूत सामने निकल कर आ रही है।
बोदला रोड पर स्थित करोड़ों रुपए की चार बीघा जमीन पर केयरटेकर रवि कुशवाहा, उसके भाई शंकरिया और चौकीदार ओमप्रकाश को पुलिस ने 26 अगस्त को गिरफ्तार किया था। पुलिस के द्वारा उनसे नौ किलोग्राम गांजा बरामद दिखाकर जेल भेजा गया था। जमीन पर कब्जे के लिए किए गए इस फर्जी मुकदमे की जांच की रफ्तार भी रॉकेट की गति से भी ज्यादा तेज रही। विवेचक आशीष कुमार त्यागी ने केस डायरी में पहला पर्चा 26 अगस्त को ही काटा। इसमें गिरफ्तारी की जानकारी और फर्द बरामदगी, एफआइआर लेखक का बयान व आरोपितों के बयान दर्ज किए। आरोपितों के बयान में विवेचक ने लिखा कि उन्होंने जुर्म से माफी मांगते हुए बताया कि साहब हमारा साथी अरुण हमें गांजा बेचता है। हम लोग गांजा खरीदने की डील कर रहे थे। तभी पुलिस ने हमें पकड़ लिया। साहब माफ कर दो। शेष बयान अपने वकील के माध्यम से न्यायालय में देंगे। गिरफ्तार तीनों आरोपितों के बयान का मजमून समान ही रहा। इन पर केवल नाम अलग लिखे गए हैं। केस डायरी के दूसरे पर्चे में वादी विकास कुमार का बयान, तीसरे पर्चे में फर्द में दर्शाए गवाहों के बयान लिखे हैं। गवाह सभी पुलिसकर्मी ही हैं। कोई स्वतंत्र गवाह शामिल नहीं है। विवेचक ने केस डायरी का पर्चा नंबर चार 11 सितंबर को लिखा। इसमें अरुण की तलाश को खेरिया मोड़, सराय ख्वाजा, पृथ्वीनाथ फाटक, पथौली व अन्य मोहल्लों में जाने का जिक्र है। 17 सितंबर को काटे गए पर्चा नंबर पांच में विवेचक ने पहले फरार आरोपित अरुण की तलाश में कई मोहल्लों में जाने का जिक्र किया है। इसके बाद इसी पर्चे में रवि कुशवाहा, शंकरिया और ओमप्रकाश के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत चार्जशीट लगा दी। इसमें अरुण के खिलाफ विवेचना प्रचलित रखी गई। 20 सितंबर को केस डायरी में पर्चा नंबर छह काटकर कोर्ट भेजा गया। इसमें फरार आरोपित की कई मोहल्लों में तलाश करने और एफएसएल से मिली गांजे के नमूने की रिपोर्ट लिखी गई है। इसमें लिखा है कि आरोपितों से बरामद गांजे से 24 ग्राम गांजा 28 अगस्त को फोरेंसिक लैब भेजा गया। 29 अगस्त को यह वहां प्राप्त हो गया। फोरेंसिक वैज्ञानिकों ने 11 सितंबर को अपनी रिपोर्ट दे दी। इसमें लिखा है कि जांच के लिए पैकेट में भेजी गई वस्तु गांजा पाई गई। विवेचक ने फर्जी मुकदमे में भी आरोपियों को फंसा दिया। विवेचक की वजह से ट्रायल पर मुकदमा आने के बाद उनको सजा भी हो सकती थी। गनीमत रही कि इस बात का खुलासा हो गया कि मुकदमा फर्जी था नहीं तो सभी लोगों की जिंदगी खराब हो जाती। विवेचक की बात करें तो वह 2019 बैच के हैं। नियुक्ति 2020 में हुई। उन्हें सिर्फ तीन साल का ही अनुभव है।
वरिष्ठ अधिवक्ता डॉक्टर अरुण कुमार दीक्षित।
वरिष्ठ अधिवक्ता डॉक्टर अरुण कुमार दीक्षित का कहना है कि गरीब परिवार को जेल भेजने के मामले में कानून व्यवस्था को मजाक बना दिया गया है। वह डीजीपी को पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के लिए पत्र लिखेंगे। उन्होंने कहा है कि ऐसे विवेचक को तत्काल बर्खास्त कर देना चाहिए और उनके खिलाफ गंभीर धारा में मुकदमा दर्ज होना चाहिए। अधिवक्ता डॉ. दीक्षित ने इस बात को लेकर भी चिंता जताई है कि विवेचक को अभी तक निलंबित नहीं किया गया है। उनका यह भी कहना है कि थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार को भी बर्खास्त कर देना चाहिए। तत्काल प्रभाव से उनकी गिरफ्तारी होनी चाहिए। एक गरीब परिवार को जेल भेजकर उन्होंने कानून को अपने हाथ में लिया है। इसके साथ ही जिस दरोगा शक्ति राठी ने महिला को धमकी मिलने वाले प्रार्थना पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं की उस पर भी बर्खास्तगी की कार्रवाई होनी चाहिए। पुलिसकर्मियों पर बर्खास्तगी कार्रवाई इसलिए करनी चाहिए, जिससे भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति ना हो सके। उन्होंने यह भी कहा है कि पीड़ित परिवार उनसे संपर्क कर सकता है। वह निशुल्क में उनको कानूनी सहायता प्रदान करेंगे।
पीएल पैलेस के होटल में थानाध्यक्ष सीसीटीवी कैमरे में हुआ कैद, मुकदमा दर्ज
रवि कुशवाहा के रिश्तेदार मोहित कुशवाहा ने आरोप लगाया था कि पांच जनवरी को थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार और बिल्डर ने उन्हें होटल में बुलाया था। धमकी दी थी कि अगर उनकी बात नहीं मानी तो गोली मार दी जाएगी। शिकायत पर डीसीपी ने होटल के सीसीटीवी कैमरे चेक किए। कैमरे की फुटेज में थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार आते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद हरीपर्वत थाने में उनके और बिल्डर के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया है।
होटल में आता हुआ दिखाई दे रहा थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार।