-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। जगदीशपुरा में करोड़ों रुपए की जमीन पर कब्जे के मामले में 61 दिन बाद पुलिस ने पीड़ितों के घर का लूटा गया सामान बरामद किया है। मुकदमे में माल बरामदगी की धारा बढ़ाई गई है।
बैनारा फैक्ट्री के पास 40 करोड रुपए की जमीन पर कब्जा कराने के लिए पुलिस ने दो फर्जी मुकदमे दर्ज कर कुशवाहा परिवार के पांच निर्दोष लोगों को जेल भेज दिया था। अगस्त 2023 में पहले नौ किलोग्राम गांजा बरामदगी का मुकदमा लिखा गया। रवि कुशवाह, संकरिया और ओमप्रकाश को जेल भेजे गए। नौ अक्तूबर को अपमिश्रित शराब का मुकदमा लिखा गया था। इस मुकदमे में रवि की पत्नी पूनम और बहन पुष्पा को जेल भेजा गया। उसके बाद वहां रातों रात कब्जा कराया गया था। इस मामले की शिकायत तत्कालीन डीजीपी से हुई थी। लखनऊ स्तर से जांच हुई थी। सात जनवरी को जमीन की कथित मालकिन उमा देवी की तहरीर पर डकैती की धारा के तहत मुकदमा लिखा गया था। तत्कालीन एसओ जगदीशपुरा जितेंद्र कुमार, अमित अग्रवाल और पुरुषोत्तम पहलवान जेल में हैं। बिल्डर उनके बेटे और किशोर बघेल को हाईकोर्ट से राहत मिल गई थी। जांच में यह खुलासा हुआ था कि मौके पर रखा सामान किशोर बघेल ट्रैक्टर में भरकर ले गया था।
किशोर बघेल को पुलिस पहले पकड़ नहीं पाई। हाईकोर्ट से राहत के बाद किशोर बघेल खुद थाने आया था। इंस्पेक्टर जगदीशपुरा आनंद वीर सिंह ने बताया कि किशोर बघेल से पूछताछ के बाद शुक्रवार को रवि कुशवाह के घर का सामान बरामद किया गया। सामान बोदला क्षेत्र में ही एक प्लाट में छिपाया गया था। कपड़े, बर्तन, बक्सा आदि सामान मिल गया है। टीवी और फ्रिज नहीं मिले। सामान बरामदगी की सूचना पर रवि कुशवाह भी मौके पर आ गया था। उसने अपने सामान को पहचाना। पुलिस ने सामान मिलने के बाद मुकदमे में डकैती का माल बरामदगी की धारा 412 की बढोत्तरी की है।
किशोर बघेल ने पूछताछ में बताया कि उसे पुरुषोत्तम पहलवान ने मौके पर बुलाया था। पुरुषोत्तम और उसकी बिल्डर से पहचान है। उन्हें यह नहीं पता था कि मामला इतना तूल पकड़ लेगा। वह मौके पर रखा सामान ट्रैक्टर में भरकर ले गया था। एक प्लाट पर रख दिया था।
गांजे वाले मुकदमे की विवेचना हो रही पुनः, विवेचक की चाल धीमी
रवि कुशवाह, संकरिया और ओमप्रकाश को नौ किलोग्राम गांजा लगाकर जेल भेजा गया था। तत्कालीन पुलिस कमिश्नर ने बताया था कि मुकदमा फर्जी लिखाया गया था। इसके बाद कोर्ट में पुनः विवेचना के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया। विवेचना चौकी प्रभारी अवधपुरी अमित धामा पर है। एक महीने से ज्यादा बीत जाने के बाद भी उन्होंने अभी तक विवेचना में कुछ भी नहीं किया है। जबकि पुलिस ने जब तीनों लोगों को पहले जेल भेजा था तो विवेचक आशीष त्यागी ने 21 दिन में ही चार्जशीट लगा दी थी। अब जब पुलिस फंस गई है तो विवेचना को पेंडिंग में डाल दिया गया है। पुलिस के लिए परेशानी इस बात की है अगर वह जेल भेजने वाले पुलिसकर्मियों को पार्टी बनाएंगे तो उन पर गांजा लगाना पड़ेगा और उन्हें जेल भेजना पड़ेगा।
एसआईटी भी साबित हो रही फेल, कई सवालों के जवाब नहीं खोज पाई
मामले की जांच के लिए तत्कालीन पुलिस कमिश्नर ने एक एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी की जांच की चाल कछुए से भी धीमी है। एसआईटी अभी तक कई सवालों के जवाब नहीं खोज पाई है। पुलिस किस लालच में जमीन पर कब्जा कराने के लिए तैयार हुई थी। पुलिस और बिल्डर के बीच सेटिंग किसने कराई थी? बरामद गांजा और शराब का इंतजाम कहां से हुआ था। प्लाट पर गांजा और शराब किसने छिपाई थी? गांजा बरामदगी से पहले एक वीडियो वायरल हुआ था। मौके पर गांजा बिकता है। यह दावा किया गया था। यह वीडियो किसने बनाया और किसने वायरल किया था? साजिश में एसओ के साथ और कौन-कौन पुलिसकर्मी शामिल था? उन्हें अभी तक आरोपित क्यों नहीं बनाया गया?











