आगरा। हत्या और षड्यंत्र की धारा के एक मुकदमे में मुलायम सिंह यादव के समधी पूर्व विधायक जसराना रामवीर सिंह यादव को एमपी एमएलए कोर्ट ने दोष मुक्त कर दिया है। मुकदमा 15 साल पुराना था। फिरोजाबाद में मुकदमे की पैरवी अधिवक्ता राजेश कुलश्रेष्ठ और आगरा में वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अरुण कुमार दीक्षित ने की।
जसराना से कई बार विधायक रहे रामवीर सिंह पुत्र हरदयाल के खिलाफ रामपाल सिंह ने शिकायत की थी कि रामवीर सिंह और जसराना ब्लॉक प्रमुख इनाम सिंह यादव से चुनाव को लेकर राजनीतिक रंजीश चल रही है। इसके चलते उक्त लोगों ने कई घटनाएं कराई हैं। रामपाल सिंह के लाइसेंसी शस्त्र भी इनके द्वारा चोरी करा दिए गए थे। 5 नवंबर 2007 को रामपाल सिंह अपने मित्र शशि यादव और ड्राइवर बबलू के साथ फिरोजाबाद जा रहे थे। दोपहर में एडीओ पंचायत जसराना रामदास ने उन्हें फोन किया और कहा कि आप ब्लॉक कार्यालय के कुछ जरूरी कागजात ले गए हैं। मैं आपके खिलाफ fir कराने जा रहा हूं, उन्होंने एडीओ पंचायत से कहा कि मैं आपके कार्यालय से कोई कागज नहीं लाया हूं। एडीओ ने कहा कि आप एक घंटे के अंदर ऑफिस पर आइए। जैसे ही हम ऑफिस पर पहुंचे। वहां रामवीर सिंह, इनाम सिंह मौजूद थे। इनके साथ मौजूद रामराज ने उनके मित्र शशि यादव को राइफल से गोली मार दी, जिससे वह मर गए। हिरदेश व दिलीप ने उनके रिश्तेदार और पड़ोसी प्रधान वीरपाल सिंह को गोली मार दी जिसमें वह घायल हो गए। यह देखकर उन्होंने अपनी जान बचाने की कोशिश की तो उन्हें भी अनिल और प्रदीप ने गोली मार दी। इसके बाद सभी लोग असलहा लहराते हुए वहां से चले गए। ड्राइवर बबलू और धर्मेंद्र उन्हें और वीरपाल सिंह को घायल हालत में अस्पताल में ले गए। मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। फिरोजाबाद में न्यायालय में केस चल रहा था। वादी ने हाईकोर्ट में शिकायत की थी कि विधायक की फिरोजाबाद में बहुत पहुंच है। इसलिए केस कहीं और ट्रांसफर कर दिया जाए। केस को आगरा में ट्रांसफर कर दिया गया। यहां एमपी एमएलए कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। तीन लोगों रामवीर सिंह, रामदास और इनाम सिंह के खिलाफ हत्या और षड्यंत्र की धारा में केस चल रहा था। इसमें सुनवाई के दौरान इनाम सिंह और एडीओ रामदास की मृत्यु हो गई थी। पांच लोगों का अलग केस चल रहा था। जिसमें एक वर्ष पूर्व निर्णय हो चुका है।
एमपी एमएलए कोर्ट ने पूर्व विधायक रामवीर सिंह को वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अरुण कुमार दीक्षित की दलीलों और साक्ष्यों को देखते हुए संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त कर दिया है।











