-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय पतन की ओर है। अब यह अतीत के गर्त में समा जाएगा। यहां नियम-कायदे और कानून खूंटी पर टांग दिए गए हैं। अधिकारियों के द्वारा अपने हिसाब से विश्वविद्यालय को चलाया जा रहा है। कुलपति सिस्टम में सुधार लाने वाली मांगों को सुनती नहीं हैं। हमारे सामने विश्वविद्यालय उजड़ रहा है और हम कुछ नहीं कर पा रहे हैं। अब इस विश्वविद्यालय को कैसे बचाया जाए। इस बात को लेकर पूरा शिक्षक संघ तनाव में है। यह कहना था औटा महामंत्री डॉ. भूपेंद्र चिकारा का।
औटा पदाधिकारियों की ओर से सोमवार को कार्यालय पर पत्रकार वार्ता बुलाई गई। इसमें विश्वविद्यालय के हालातों को लेकर चिंता व्यक्त की गई। डॉ. भूपेंद्र चिकारा ने कहा कि आगरा का आम्बेडकर विवि देश और प्रदेश का ऐसा पहला विश्वविद्यालय है जहां पर बिना प्रवेश पत्र के ही परीक्षाएं करा दी गई हैं। असली छात्रों की जगह फर्जी छात्र परीक्षा दे गए हों यह भी कहा नहीं जा सकता है। इसके अलावा कॉलेज में कहीं भी नकल नहीं पकड़ी गई है और नकल पकड़ने के नाम पर जमकर पैसा बहाया जा रहा है। कितनी विडंबना की बात है कि विश्वविद्यालय सभी छात्रों को प्रवेश पत्र तक नहीं दे पा रहा है। फीस स्लिप के आधार पर ही परीक्षा करा दी जा रही हैं। परीक्षाओं का मजाक बनाकर रख दिया गया है। सुबह परीक्षा होती है और पांच मिनट पहले तक केंद्र बनते हैं। यही नहीं बीच परीक्षाओं में भी केंद्र बदल दिया जाता है। गर्ल्स डिग्री कॉलेज में पुरुष शिक्षकों को उड़नदस्ते में भेजा जा रहा है। वह गर्ल्स की चेकिंग कर रहे हैं जो कि गलत है। कुलपति के द्वारा विश्वविद्यालय को अपने तरीके से चलाया जा रहा है। परीक्षा समिति को भी विश्वास में नहीं लिया जाता। कुलपति अधिनियम, परीनियमावली तथा किसी भी स्थापित कानून से खुद को ऊपर समझने लगी हैं।
डॉ. अनुराग पालीवाल ने कहा कि पिछली परीक्षाओं में शिक्षक संघ के पदाधिकारियों को कंट्रोल रूम में निरीक्षण करने के लिए ले जाया गया था। कंट्रोल रूम में लगे कैमरे में देखा गया कि कॉलेजों में जमकर सामूहिक नकल हो रही थी। विश्वविद्यालय को 11 कॉलेजों में नकल होते हुए भी दिखाई गई। इस बार की परीक्षाओं में कंट्रोल रूम का भ्रमण भी नहीं कराया गया है। डर था कि शिक्षक नेता कहीं नकल की पोल खोलकर ना रख दें। यही नहीं जो कॉलेज नकल में पकड़े गए थे उन पर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई है। परीक्षा नियंत्रक से डिबार सात कॉलेजों की कई बार सूची मांगी गई है लेकिन वह बोल देते हैं कि सूची कहीं खो गई है। डॉ. दिग्विजय सिंह ने कहा कि आगरा मंडल में कई निजी विश्वविद्यालय स्थापित हो चुके हैं। इससे आम्बेडकर विश्वविद्यालय संकट में है। फर्जीवाड़े और घोटालों ने वैसे ही इसका नाम खराब कर दिया है। इसके बाद भी विश्वविद्यालय के अधिकारी नहीं चेत रहे हैं। वह नियम विरुद्ध कार्यों को करने में लगे हुए हैं। छात्रों की परीक्षाएं तक सही तरीके से नहीं कराई जा रही हैं। रिजल्ट में संशोधन के लिए कोई सुनवाई नहीं हो रही। ऐसा इसलिए किया जा रहा है जिससे छात्र परेशान होकर निजी विश्वविद्यालय में प्रवेश ले सके। यहां के अधिकारी विश्वविद्यालय को पतन की ओर ले जा रहे हैं। डॉ. निर्मला सिंह ने कहा कि उड़नदस्तों को कहीं भी नकल नजर नहीं आई। जबकि कॉपियों का मूल्यांकन किया जा रहा है तो सभी कॉपियों में एक जैसे शब्द हैं, जिससे स्पष्ट हो रहा है कि नकल माफिया ने जमकर नकल कराई है। डॉ. पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय में पैसे लेकर केंद्र बनाए रहे हैं। एक ही मैनेजमेंट के कॉलेजों को केंद्र बना दिया जाता है। उन्होंने कहा कि अब शिक्षक संघ शांत नहीं बैठेगा। कुलपति को नियम और परीनियमावली का उल्लंघन नहीं करने दिया जाएगा। अगर कुलपति और विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं किया तो शिक्षक लामबंद होकर धरना प्रदर्शन करेंगे। इस अवसर पर डॉ. शशिकांत पांडे, डॉ. विजय कुमार, डॉ गौरव कौशिक, डॉ. केके गौतम, डॉ. एके सिंह, डॉ. प्रभात कुमार, डॉ. पूनम तिवारी, डॉ. भूपाल सिंह आदि शामिल रहे।











