-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. अरविंद दीक्षित की मुश्किलें बढ़ गई हैं। विजिलेंस ने उन पर लगे भ्रष्टाचार व अन्य आरोपों को गोपनीय जांच में सही पाया है। शासन के निर्देश पर अब उनकी खुली जांच शुरू हो गई है।
बता दें कि पूर्व कुलपति डॉ. अरविंद कुमार दीक्षित पर कुलपति रहने के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। आरोपों को गंभीर देखकर शासन ने उनकी विजिलेंस जांच शुरू कराई। गोपनीय जांच में दोषी पाए जाने के बाद अब उनकी खुली जांच शुरू करने के आदेश आ गए हैं। डॉ. दीक्षित के अलावा शिकायत में कई और अधिकारी, प्रोफेसर भी शामिल हैं। इन सभी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं
शिकायत में क्या-क्या बिंदू हैं, जानें
विशेष सूत्रों की मानें तो शिकायत में आरोप लगाए गए थे कि डॉ. दीक्षित ने 145 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य कराए, जबकि उनकी कोई आवश्यकता नहीं थी। आरोप लगाया गया कि 30 प्रतिशत कमीशन के लालच में यह कराए गए। संस्कृति भवन का विवि भूस्वामी नहीं है। एडीए से नक्शा पास नहीं है। फिर भी वहां 50 करोड़ की लागत से इमारत बनवाकर खड़ी करा दी गई। शासन के आदेश के विपरीत जाकर उन्होंने संविदा पर कई चहेतों और अपने रिश्तेदारों को नौकरी दी। एक युवक को गाय का दूध निकालने के लिए अपनी कोठी पर नौकरी दी गई। माइंडलाजिक्स एजेंसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज था। फिर भी उसका भुगतान किया गया। परीक्षाओं के बीच में पैसे लेकर केंद्र बनाए जाने, माफिया से वसूली कर अन्नपूर्णा कैंटीन का निर्माण कराए जाने, निर्धारित अनुभव नहीं होने पर भी अधिवक्ताओं की नियुक्ति किए जाने, इंडियन साइंस कांग्रेस में पदाधिकारी बनने को फर्जी वोटर बनाए जाने, सुरक्षा में दरोगा के होने के बावजूद बाउंसर रखे जाने, तीन महीने का कार्य विस्तार मिलने पर नियम विरुद्ध कार्य किए जाने, एनजीटी से अनुमति लिए बिना पेड़ कटवाए जाने आदि बिंदुओं पर शिकायत की गई थी।
संस्कृति भवन में आ रहा करोड़ों का फर्नीचर
संस्कृति भवन की विजिलेंस जांच चल रही है। यह देख पूर्व कुलपति प्रो. आलोक राय और प्रो. अशोक मित्तल ने उसका उदघाटन नहीं कराया था। विशेष सचिव उच्च शिक्षा ने भी बिल्डिंग को विवादित देख इसका उदघाटन करने के मना किया था। वर्तमान कुलपति ने उसका उदघाटन करा दिया। अब यहां बड़ी तादाद में महंगा फर्नीचर खरीदा जा रहा है।











