लंदन। ब्रिटिश शाही परिवार के लोग काफी बेहतर जिंदगी जीते हैं और उनके पास हर वो चीज है, जिसके एक आम इंसान सिर्फ सपने देखता है। हालांकि, शाही परिवार के लोगों को भी चुनौतियों और मुश्किलों का सामना करना पड़ता है और वो है पैरेंटिंग। रॉयल मां केट मिडलटन ने कई मौकों पर पैरेंटिंग को लेकर अपनी मुश्किलों के बारे में बात की है।
साल 2011 में 29 अप्रैल को प्रिंस विलियम और केट मिडलटन ने शादी की थी और इसके दो साल बाद 2013 में 22 जुलाई को इनका पहला बच्चा हुआ। इसके बाद एक बेटी और एक बेटा पैदा हुआ। केट और प्रिंस विलियम के तीन बच्चे हैं और ये शाही परिवार अक्सर हर इवेंट और पारिवारिक समारोह में एक साथ दिखता है।
केट मिडलटन ने पैरेंटिंग में आई चुनौतियों के बारे में ही नहीं बताया बल्कि प्रेग्नेंसी में उन्हें किस तरह की दिक्कतें हुईं, इस बारे में शेयर किया। अपने एक इंटरव्यू में केट ने बताया कि उन्हें प्रेग्नेंसी के दौरान हाइपरमेसिस हो गया है। इसमें उल्टी और मतली बहुत गंभीर हो जाती है। केट कहती हैं कि उस समय इसे कंट्रोल करने के लिए उन्होंने हर चीज ट्राई की थी।
केट कहती हैं कि उन्हें भी मां बनने के बाद मॉम गिल्ट हुआ था। उनका कहना है कि अगर कोई महिला कहती है कि उसे मॉम गिल्ट नहीं हुआ, तो वो झूठ बोल रही है। अपने एक्सपीरियंस से केट कहती हैं कि आप चाहे जितनी भी मशक्कत कर लें, आपको यही लगेगा कि आपसे कहीं कमी रह गई है। यहां आप इस बात को ध्यान में रखें कि कोई भी परफेक्ट नहीं हो सकता है और हम अपनी गलतियों से ही सीखते हैं और मां के साथ भी ऐसा ही होता है।
केट ने बताया कि उस वक्त उन्हें मेडिटेशन और डीप ब्रीदिंग से काफी मदद मिली। केट बताती हैं कि उनके लिए हाइपरमेसिस ऐसा था जैसे कि वो लेबर पेन में ही हों। शाही परिवार के लोगों पर बहुत जिम्मेदारियां होती हैं लेकिन इसके साथ ही उन्हें बच्चों पर भी ध्यान देना होता है। जब उनके बेटे प्रिसं जॉर्ज का जन्म हुआ था तो केट और प्रिंस विलियम ने बाहर से किसी की हेल्प के लिए मना कर दिया था। उन्होंने बिना किसी नैनी या हेल्पर के बच्चे की परवरिश की है। लेकिन जब उन्हें जरूरत लगी तो उन्होंने हेल्प लेना शुरू किया। केट कहती हैं कि अगर आपको काम और बच्चों के बीच में मशक्कत करनी पड़ रही है तो हेल्पर लेने में कोई बुराई नहीं है।











