आगरा। खेरागढ़ में एक और जहां पांच लाशें मिलने के बाद मामला गमगीन है। घरों में चूल्हे नहीं जल रहे हैं। लापता अन्य लोगों को खोजने के लिए पुलिस- प्रशासन और सेना दिन रात एक किए हुए है। वहीं दूसरी और एक नेताजी उन लाशों पर राजनीति कर रहे हैं। उनके द्वारा लाशों पर राजनीति करने का मामला सुर्खियों में है। चर्चाएं हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट के लिए के उन्होंने लाशों पर भी राजनीति तो की लेकिन दांव उल्टा पड़ गए। इसके बाद वह अपना मुंह छुपाए घूम रहे हैं।
कुशियापुर गांव के लोग गुरुवार दोपहर देवी मूर्तियों को विसर्जन के लिए डूंगरवाला गांव के पास लेकर आए थे। विसर्जन के दौरान 13 लोग उटंगन नदी में डूब गए थे। हादसे में गुरुवार को तीन युवकों की मृत्यु हो गई थी। वहीं एक युवक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। शुक्रवार को दो शव और मिले। चर्चाएं हैं कि एक नेताजी ने लाशों पर राजनीति करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्हें लोगों की आंखों में आंसू भी नजर नहीं आए। सूत्रों के मुताबिक अपनी टिकट के लिए वर्तमान जनप्रतिनिधि के खिलाफ फील्डिंग तैयार की। जनप्रतिनिधि के समर्थकों को इस बात की भनक लग गई। उन्होंने दूसरे जनप्रतिनिधि के खिलाफ नारे लगा दिए। इसके बाद नेताजी का दांव उल्टा पड़ गया। राजनीति करने वाले नेताजी का नाम राजनीतिक गलियारों में उजागर होने के बाद उनके चेहरे की हवाइयां उड़ी हुई हैं। राजनीतिक गलियारों में बस यही चर्चा है कि नेताजी लाशों पर तो राजनीति नहीं करते! उन्हें आखिर शर्म क्यों नहीं आई? जिला स्तर के पदाधिकारी को भी बदनाम करने के लिए भी नेताजी ने कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन जिला स्तर के पदाधिकारी के समर्थक भी मजबूत थे और उनके लिए समर्पित भी। क्योंकि वह जानते थे जिला स्तर के पदाधिकारी अपनी मेहनत और जमीनी स्तर के नेता होने की वजह से मुकाम हासिल किए हैं।











