आगरा। मिशन शक्ति चरण 5.0 विशेष अभियान के अंतर्गत आगरा कॉलेज में “साइबर सुरक्षा, डिजिटल अरेस्ट एवं डिजिटल फ्रॉड” विषय पर महत्वपूर्ण सेमिनार का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम में साइबर सेल, पुलिस कमिश्नरेट, आगरा से पधारे साइबर विशेषज्ञ शांतनु अग्रवाल ने अत्यंत सरल एवं प्रभावशाली ढंग से बताया कि डेटा क्या है तथा वर्तमान डिजिटल युग में इसका क्या महत्व है। उन्होंने कहा कि हमारा व्यक्तिगत डेटा अक्सर विभिन्न माध्यमों से बाहर चला जाता है, जिसका दुरुपयोग साइबर अपराधी बड़ी सहजता से कर लेते हैं। साइबर अपराधों का मुख्य कारण प्रायः उपयोगकर्ताओं का लालच होता है, जब वे अनजाने लिंक, वेबसाइट्स, कॉल्स या ऐप्स पर क्लिक कर देते हैं। उन्होंने सावधानीपूर्वक उपयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि किसी भी अनजान लिंक, संदेश, चित्र या वीडियो को एक्सेस न करें।
श्री अग्रवाल ने बताया कि किसी भी डिजिटल फ्रॉड की स्थिति में तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध घटित होने के पहले एक घंटे को “स्वर्णिम समय” कहा जाता है, क्योंकि इस अवधि में पैसा वापस आने की संभावना सर्वाधिक होती है।इसके उपरांत साइबर विशेषज्ञ भगवान सिंह ने अपने व्याख्यान में बताया कि आजकल डिजिटल अरेस्ट एक नई प्रकार की ठगी बनकर तेजी से उभर रहा है, जबकि भारत के किसी भी कानून में डिजिटल अरेस्ट का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी पुलिस या प्रशासन किसी व्यक्ति को डिजिटल रूप से गिरफ्तार नहीं कर सकता।
उन्होंने बताया कि साइबर अपराध दो प्रकार के होते हैं — आर्थिक फ्रॉड एवं सामाजिक फ्रॉड — जिनसे बचाव हेतु जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि अपने व्हाट्सएप में टू-स्टेप वेरीफिकेशन अवश्य सक्रिय करें। साथ ही कुछ सुरक्षित साइट्स और ऐप्स जैसे haveibeenpwned.com, eScan Cybersecurity, संचार साथी, तथा virustotal.com का प्रयोग करने की सलाह दी। मुख्य अतिथि प्रोफेसर पूनम चांद ने अपने उद्बोधन में कहा कि विशेषज्ञों द्वारा दी गई जानकारियां अत्यंत उपयोगी हैं, जिन्हें हमें अपने दैनिक जीवन में अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीक जितनी सुविधाजनक है, उसका दुरुपयोग उतना ही घातक सिद्ध हो सकता है। सेमिनार का सफल संचालन आर्मी गर्ल्स विंग की कंपनी कमांडर कैप्टन रीता निगम द्वारा किया गया। उन्होंने विद्यार्थियों एवं एनसीसी कैडेट्स को संबोधित करते हुए कहा कि आज प्राप्त ज्ञान केवल स्वयं तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने परिजनों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों के साथ साझा करें ताकि समाज में साइबर अपराधों के प्रति व्यापक जागरूकता फैल सके।कार्यक्रम में प्रो. वी.के. सिंह (मुख्य प्रानुशासक), डॉ. गौरव कौशिक (मीडिया प्रभारी), प्रोफेसर दीपा रावत, प्रो. जयश्री भारद्वाज, प्रो. सुनीता गुप्ता, प्रो. कमलेश शर्मा, प्रो. डीसी मिश्रा आदि उपस्थित रहे।











