आगरा। एक पीड़ित अपनी शिकायत लेकर थानाध्यक्ष के पास पहुंचा था। थानाध्यक्ष ने उससे कुछ दिन तक थाने में काम कराया। उसके बाद कहा कि तुम्हारी मदद तभी करूंगा जब तुम मेरे गांव में घर पर जाकर नौकर का कार्य करोगे। पीड़ित को वहां पर बंधक बना लिया गया। भैंसों का गोबर उठवाया गया। शौचालय धुलवाए गए। वहां उसके द्वारा काम करने के लिए मना किया गया तो थानाध्यक्ष ने मुंशी भेजकर उसे थाने बुला लिया और यहां दोबारा से मजदूरी का कार्य शुरू करा दिया। पुलिस कमिश्नर ने एसीपी खेरागढ़ को जांच के आदेश दिए हैं। पीड़ित का आरोप है कि उससे जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। अगर जांच में आरोप सही पाए गए तो थानाध्यक्ष और उनके परिवार के खिलाफ एससी-एसटी सहित कई धारा में मुकदमा दर्ज किया जा सकता है।
अजीजपुर, नई आबादी, धनौली (मलपुरा) निवासी शैलेंद उर्फ रिंकू ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत की है कि वह 19 जुलाई 2023 को उनके समक्ष पेश हुआ था। उन्हें बताया था कि पत्नी घर का सामान लेकर चली गई है। पुलिस कमिश्नर ने थाना मलपुरा फोन कर उसकी मदद के आदेश दिए थे। वह मलपुरा थाने पहुंचा। थाना प्रभारी ने बात सुनी। जांच में सामने आया पत्नी ने जगनेर में किराए पर मकान लिया है। वहां सामान बंद करके अपने मित्र के साथ चली गई थी। इस जानकारी पर एसओ मलपुरा ने जगनेर थाना प्रभारी को फोन किया। बताया कि पुलिस कमिश्नर साहब का फोन आया था। पीड़ित की मदद करनी है। 20 जुलाई को वह थाना जगनेर पहुंचा। थानाध्यक्ष जगनेर अवनीत मान ने उसकी बात सुनी, उससे कहा कि मदद करेंगे, उसे थाना परिसर में ही एक कमरा दे दिया। कहा कि वह थाने में रहे। पीड़ित का आरोप है कि थाने में पुलिस कर्मी उससे काम कराने लगे। कोई कपड़े धुलवाता तो कोई झूठे बर्तन साफ कराता। 18 अगस्त तक उसने थाने में मजदूरी की। उसके बाद थाना अध्यक्ष ने उससे कहा कि गांव में उनका मकान बन रहा है। वहां देखरेख के लिए जाना है। वापस लौटकर आएगा तो सामान वापस दिला देंगे। थाने में तैनात मुंशी अक्षय उसे लेकर आईएसबीटी आया। एक बस में बैठाया। परिचालक पुलिस का परिचित था। परिचालक ने उसे बड़ौत (बागपत) छोड़ा। वहां थानाध्यक्ष के पिता मिले। अपने गांव सिनौली (बड़ौत) ले गए। वहां उसके साथ जानवरों जैसा व्यवहार हुआ। भैंसों का गोबर उठवाया गया। घर वापस करने की जिद करने पर उसे पीटा गया। एक महीना दो दिन वह कैद में रखा। घर में दिक्कत है यह बहाना बनाने पर थानाध्यक्ष ने थाने से अक्षय मुंशी को भेजा। अक्षय मुंशी वहां से उसे थाने लेकर आया। थाने में थानाध्यक्ष ने उसे धमकाया। जेल भेजने की धमकी दी। सामान वापस नहीं दिलाया। दोबारा थाने में रख लिया। मजदूरों की तरह काम कराया। 15 अक्तूबर को वह थाना पुलिस की कैद से छूटा। पुलिस आयुक्त डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने एसीपी खेरागढ़ को जांच के आदेश दिए हैं।
पीड़ित ने प्रार्थना पत्र में थाना प्रभारी के अलावा संचित मुंशी, सुशील बैसला, अंकित, अक्षय, जगवीर, सनी को आरोपित किया है। पीड़ित का कहना है कि जांच कराई जाए। एक ही थाने में तैनात ये पुलिस कर्मी आपस में रिश्तेदार हैं। एक ही बिरादरी के हैं।











