आगरा। किरावली थाने में राजू शर्मा की दोनों टांगें तोड़ने वाले थानाध्यक्ष और अन्य पुलिसकर्मी खुले में घूम रहे हैं। यह देख पीड़ित परिवार अचंभित है। अभी तक दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं होने से वह अचंभे में है। भविष्य में राजू चल पाएगा या नहीं अभी यह भी क्लियर नहीं है। राजू को अवैध हिरासत में रखना उसे थर्ड डिग्री देना सब कुछ पानी की तरह साफ है फिर भी मुकदमा दर्ज नहीं किया जा रहा है। बीते दिनों दयालबाग चौकी प्रभारी ने एक युवक को छोड़ने के नाम पर दस हजार की रिश्वत ली थी उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करना तो दूर की बात है निलंबन भी नहीं किया गया। सिर्फ लाइन हाजिर की कार्रवाई कर खानापूर्ति कर दी गई। क्या कोई बड़ी कार्रवाई नहीं होने से पुलिसकर्मी बेकाबू हो गए हैं? यह सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
हरी पर्वत क्षेत्र के श्री राम हॉस्पिटल में एडमिट राजू शर्मा का कहना है कि मुझे एक घंटे तक थर्ड डिग्री दी गई थी। दर्द सहना मेरे लिए मुश्किल हो गया था। आंखों के सामने अंधेरा छा गया था। वह थानाध्यक्ष से रहम की भीख मांग रहे थे लेकिन वह जल्लाद बना हुआ था। वह डंडे पर डंडे तुड़वाता जा रहा था। वह जब थर्ड डिग्री दिए जाने वाले दिन की बात बताते हैं तो सहम जाते हैं। कह रहे हैं वह जीवन भर यह हादसा नहीं भूल पाएंगे। पुलिस की छवि उनकी नजरों में हमेशा के लिए खराब हो गई है। जल्लादों वाली हो गई है। उनका यह भी कहना है कि जिस रिटायर्ड फौजी बलबीर सिंह की हत्या के लिए उन्हें दोषी बताया जा रहा था, जिस दिन हत्या हुई थी उस दिन वह आगरा में थे। उनकी लोकेशन आगरा में निकलने पर भी उन्हें थर्ड डिग्री दी गई। दर्द कम करने के लिए डॉक्टर लगातार पैन किलर दे रहे हैं, लेकिन वह काम नहीं कर रही है। दोनों पैरों में प्लास्टर चढ़ा हुआ है। राजू के पिता राधेश्याम का कहना है कि जब उनके बेटे के दोनों पैर तोड़ दिए गए तो पुलिस मामले को दबाने में जुट गई। थानाध्यक्ष नीरज कुमार ने उनसे कहा थोड़ी गलती हो गई है। आप चिंता मत करना। मैं इलाज करा दूंगा। बस किसी से कुछ कहना नहीं है। सबसे यही बोलना बेटा चलते-चलते गिर गया है। जब उन्होंने अपने बेटे का हाल देखा तो उनकी आंखों में से आंसू बहने लगे। बेटा बोला पुलिस ने बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं। पांच डंडे मेरे ऊपर तोड़ दिए। उनका कहना है कि थानाध्यक्ष नीरज कुमार ने जबरन उन्हें कुछ देने की भी कोशिश की थी लेकिन वह उन्होंने लिए नहीं। थानाध्यक्ष का कहना था कि बच्चों को कुछ सामान दिलवा देना। राजू का कहना है कि दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जब वह जेल भेजे जाएंगे तभी उसे न्याय मिलेगा।
चौकी नहीं चला पाए और थाना पा गए नीरज
जो नीरज कुमार चौकी नहीं चला पाए थे 20 दिन ही बसई चौकी पर रह पाए और अपनी करतूत की वजह से आईपीएस की रिपोर्ट पर वहां से हट गए। उन्हें थाने की कमान दे दी गई। नीरज कुमार की बात करें तो वह हाई कोर्ट के आदेश को भी नहीं मानते हैं। एक मुकदमे को हाईकोर्ट ने क्वैश कर दिया। इसके बावजूद उन्होंने उसमें चार्जशीट लगा दी। कोर्ट में उनके खिलाफ और चार्जशीट सबमिट करने वाले एसीपी के खिलाफ बाद दायर हो चुका है, जिसमें सुनवाई चल रही है। नीरज कुमार के साथ जो दरोगा भी शामिल था उसकी भ्रष्टाचार की एक महीने पहले शिकायत हुई थी जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वह थाने में ही बना रहा।











