-गौरव प्रताप-
अगरा। डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में इंटर किए हुए युवक परीक्षक बनकर ड्यूटी दे रहे हैं। कॉलेजों में शिक्षक नहीं हैं। फिर भी विश्वविद्यालय ने सांठगांठ करके उन्हें केंद्र बना दिया है। विशेष सूत्रों की मानें तो अछनेरा के जिस कॉलेज का पेपर लीक में नाम सामने आया है, उस कॉलेज में अनेक नाम के युवक ने सबसे पहले पेपर का फोटो खींचा था। वह झारोटी का रहने वाला है। कॉलेज में शिक्षक नहीं होने पर परीक्षा में उसे ड्यूटी देने के लिए बुलाया गया था। पुलिस उसकी तलाश में दबिश दे रही है। कॉलेज में शिक्षक नहीं थे फिर भी उन्हें केंद्र बना दिया गया है। इस बात के लिए केंद्र बनाने वाली कमेटी भी जांच के घेरे में आ सकती है?
11 मई को आगरा कॉलेज के प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने कई छात्रों के मोबाइल फोन में पेपर पकड़ा था। प्राचार्य की ओर से मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। 14 मई को दोबारा आगरा कॉलेज में छात्र-छात्राओं के मोबाइल में पेपर पकड़ा गया। एक घंटे पहले ही पेपर उनके मोबाइल फोन पर आ गया था। पुलिस मामले की गंभीरता से जांच करने में जुटी हुई है। जांच में अछनेरा के एक कॉलेज का नाम सामने आया है। पुलिस जब कॉलेज में पहुंची तो वह यह देखकर ही दंग रह गई कि कॉलेज को मान्यता कैसे मिल गई? कॉलेज सुनसान जगह पर बीच खेत में बना हुआ है। वहीं उसकी बिल्डिंग भी जर्जर हालत में है। जिस शिक्षक के मोबाइल फोन से सबसे पहले किसी को पेपर भेजा गया था उसके बारे में पुलिस ने पता लगा लिया है। शिक्षक का नाम अनेक बताया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो केवल परीक्षाएं कराने के लिए शिक्षक को हायर किया गया था। छानबीन में यह भी पता चला है कि वह इंटरमीडिएट है। विश्वविद्यालय ने शिक्षक नहीं होने पर भी इस कॉलेज को केंद्र कैसे बना दिया? इसके लिए पुलिस द्वारा विश्वविद्यालय के सक्षम अधिकारियों और केंद्र बनाने वाली कमेटी को जांच में शामिल किया जा सकता है।
कैसे बने केंद्र, जानें पूरा खेल
आगरा। इस बार की परीक्षा में केंद्र बनाने में जमकर धांधली हुई। एक ही मैनेजमेंट के कई कॉलेजों को आपस में केंद्र बना दिया गया। वहीं जिस कॉलेज को 80 किलोमीटर दूर किसी कॉलेज में सुविधा मिल सकती है तो उसने वहां अपना केंद्र बनवा लिया। केंद्र बनाने के लिए आंगनबाड़ी किट के नाम पर करोड़ों रुपए का हेरफेर होने के आरोप लग रहे हैं और किट चंद लाख रुपयों की थीं। उच्च स्तरीय जांच होने पर इस बात का खुलासा हो सकता है। फीलगुड के चक्कर में विश्वविद्यालय ने ऐसे कॉलेजों को केंद्र बना दिया है जो मानक ही पूरे नहीं कर रहे हैं। औटा महामंत्री डॉ. भूपेंद्र चिकारा का कहना है कि उन्होंने कई बार कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक को पत्र लिखकर अवगत कराया कि केंद्र बनाने में अनियमितता हो रही है। एक ही मैनेजमेंट के कॉलेज आपस में केंद्र बना दिए गए हैं, लेकिन उन्होंने कोई कार्यवाही नहीं की। परीक्षा केंद्रों में गड़बड़ी होने के बाद कॉलेज संचालकों के हौसले बढ़ गए और वह पेपर लीक जैसी घटनाएं कर रहे हैं।
पूर्व कुलपति ने बनाई थी 37 शिक्षकों की भौतिक सत्यापन के लिए कमेटी
आगरा। कर्मचारी नेता डॉ. आनंद टाइटलर ने बताया कि पूर्व कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार राय ने कॉलेजों के भौतिक सत्यापन के लिए 37 शिक्षकों की एक समिति बनाई थी। समिति को कॉलेजों में यह देखना था कि वहां शिक्षक हैं या नहीं? फर्नीचर है या नहीं? मूलभूत सुविधाएं हैं या नहीं? कॉलेज सही स्थान पर हैं या नहीं? वर्तमान कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक ने किसी से भी कॉलेज का भौतिक सत्यापन नहीं कराया। डॉ. टाइटलर उच्च शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर कुलपति के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।











