-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। वर्तमान दौर में छोटी-छोटी बातों को लेकर पति-पत्नी के बीच झगड़े हो रहे हैं। छोटी-छोटी बातों से परिवार टूट रहे हैं। आखिर इन टूटे हुए परिवारों को कैसे बचाया जाए। इसके लिए हाईकोर्ट की तरफ से खंदारी के आईईटी परिसर में ‘अवधारणा और मध्यस्थता की तकनीक’ विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसमें 14 जनपदों के परिवार न्यायालय के न्यायाधीशों को यह टिप्स दिए जा रहे हैं कि उन्हें टूटे हुए परिवारों को कैसे बचाना है।
शनिवार सुबह प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ चीफ जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर के मार्गदर्शन में प्रशासनिक जज न्यायमूर्ति अश्विनी मिश्रा और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला द्वारा किया गया।

प्रशासनिक जज न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला का विश्वविद्यालय परिसर में आगमन पर निदेशक प्रोफेसर वीके सारस्वत ने बुके देकर स्वागत किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले सत्र में पारिवारिक मामलों की संवेदनशीलता पर जोर दिया गया।
न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा ने अपने उद्बोधन में कहा कि यदि परिवार शांति में हैं तो समाज भी सुरक्षित रहेगा। उन्होंने पारिवारिक मामलों के क्षेत्र में अपने व्यापक अनुभव को साझा किया। उन्होंने बताया कि पारिवारिक विवाद कैसे होते हैं और उनके निस्तारण किस प्रकार किए जा सकते हैं, उन्होंने यह भी बताया कि रिश्तो को बचाने के लिए अलग दृष्टिकोण व विनम्रता की आवश्यकता होती है। क्योंकि इसमें व्यक्तिगत भावनाएं शामिल होती हैं।
न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला ने तेजी से बदलते इस युग में प्रशिक्षण व मध्यस्थता तकनीकी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पारिवारिक मामलों को प्रभावी ढंग से हल कैसे किया जाए। यह आपको इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से बेहतर तरीके से सीखने को मिलेगा।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में एक नाटक के लिए एक महिला और एक पुरुष जिला जज को पति-पत्नी के रूप में किरदार निभाने के लिए कहा गया। नाटक काफी रोचक था। नाटक में एक जज को मध्यस्थता कराने के लिए नियुक्त किया गया था। जिस प्रकार पति और पत्नी के बीच में विवाद होते हैं उसी प्रकार उनके बीच विवाद शुरू हुआ, लेकिन मध्यस्थता करा रहीं न्यायाधीश के द्वारा दोनों पक्षों को इस तरीके से समझाया गया कि उनमें समझौता हो गया। इस नाटक का उद्देश्य यह था कि किस प्रकार पति और पत्नी के बीच में मध्यस्थता कराई जा सकती है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में आगरा, फिरोजाबाद, फर्रुखाबाद, एटा, अलीगढ़, कन्नौज, कासगंज, मैनपुरी, मथुरा आदि जगहों के परिवार न्यायालय के न्यायाधीशों ने भाग लिया। हाईकोर्ट से आए अनूप कुमार श्रीवास्तव, नीरज उपाध्याय राजलक्ष्मी सिन्हा, संदीप सक्सेना द्वारा न्यायाधीशों को प्रशिक्षण दिया गया। इनके द्वारा प्रशिक्षण को काफी रोचक बना दिया गया था।

प्रशिक्षण शिविर के दौरान जिला जज विवेक संगल, प्रिंसिपल जज फैमिली कोर्ट विपिन कुमार, अपर जिला जज विनोद कुमार, रवि कांत रस्तोगी, रवि करण सिंह, नीरज गौतम, प्रमेंद्र कुमार, परवेज अख्तर, नीरज बख्शी, कनिष्क सिंह, प्रतिभा सक्सेना, पारुल पवार, असीफा राणा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मृत्युंजय श्रीवास्तव, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुमित चौधरी, जुडिशल मजिस्ट्रेट मयूरेश श्रीवास्तव, सौरव आनंद, सत्येंद्र कुमार मौर्या, विश्वविद्यालय के विधिक सलाहकार डॉ. अरुण कुमार दीक्षित, निदेशक आईईटी प्रोफेसर वीके सारस्वत, गौरव प्रताप सिंह आदि शामिल रहे।













