आगरा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया यूनियन बजट 2026–27 आम नागरिक की रोजमर्रा की महंगाई को सीधे प्रभावित नहीं करता, लेकिन यह बजट देश की आर्थिक दिशा, रोजगार सृजन और निर्यात बढ़ाने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बजट अल्पकालिक राहत के बजाय दीर्घकालिक विकास की मजबूत नींव रखने वाला है। यह कहना है डवलपमेंट काउंसिल फॉर फुटवियर एंड लेदर इंडस्ट्री (डीसीएफएलआई) के अध्यक्ष, काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स (सीएलई) के क्षेत्रीय अध्यक्ष (उत्तर) एवं आगरा फुटवियर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स चैंबर (एएफएमईसी) के संयोजक पूरन डावर का।
उन्होंने कहा है कि बजट में उत्पाद शुल्क और सेवा कर को लेकर कोई घोषणा नहीं की गई है, क्योंकि ये कर पहले ही जीएसटी में समाहित हो चुके हैं और उनका संचालन अलग व्यवस्था के तहत होता है। इस कारण आम लोगों को यह बजट सीधे तौर पर महंगाई या सस्ते-महंगे के रूप में महसूस नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यूनियन बजट 2026–27 में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को नई गति देने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए राजकोषीय घाटे को 4.3 प्रतिशत तक सीमित रखा है। कॉरपोरेट टैक्स में और कटौती सरकार की निवेश प्रोत्साहन नीति और उद्योग जगत में भरोसा मजबूत करने की मंशा को दर्शाती है। श्री डावर ने कहा कि रोजगार सृजन के नजरिये से बजट में एमएसएमई सेक्टर को केंद्र में रखा गया है। विशेष रूप से वस्त्र, चमड़ा और फुटवियर जैसे उद्योगों को प्राथमिकता दी गई है, जो देश में सबसे अधिक रोजगार देने वाले क्षेत्रों में शामिल हैं। निर्यात आधारित प्रोत्साहन उपायों से इन उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है।
फुटवियर और लेदर उद्योग को बड़ी राहत
उन्होंने कहा कि बजट उद्योग के लिए सकारात्मक है। सरकार द्वारा आईजीसीआर योजना के तहत इनपुट्स की सूची का विस्तार करना उद्योग की लंबे समय से चली आ रही मांग थी। इससे जूते के अपर (ऊपरी हिस्से) के निर्यात के लिए इनपुट्स को ड्यूटी-फ्री आयात किया जा सकेगा, जिससे लागत घटेगी और भारतीय फुटवियर व लेदर उद्योग की निर्यात क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
लंबी दौड़ का बजट
पूरन डावर के अनुसार, यूनियन बजट 2026–27 अल्पकालिक लोकलुभावन फैसलों से दूर रहते हुए दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती, निवेश, निर्यात और रोजगार सृजन पर केंद्रित है। यह बजट भारत की औद्योगिक क्षमता को मजबूत करने और वैश्विक बाजार में देश की स्थिति सुदृढ़ करने की दिशा में अहम साबित होगा।










