आगरा। डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय के खाते से आने वाले दिनों में ढाई सौ करोड रुपए अलीगढ़ के राजा महेंद्र प्रताप विश्वविद्यालय को दिए जाने की जोरों से चर्चाएं चल रही हैं। पूर्व में 100 करोड रुपए भी राजा महेंद्र प्रताप विश्वविद्यालय अलीगढ़ को दिए जा चुके हैं। इस बार ढाई सौ करोड रुपए दिए जाने की चर्चा की बात सुनकर विरोध शुरू हो गया है। कर्मचारी नेता डॉ. आनंद टाइटलर ने प्रमुख सचिव वित्त को पत्र लिखकर पैसा नहीं दिए जाने की गुहार लगाई है।
बता दें कि अलीगढ़ में राज्य सरकार ने राजा महेंद्र प्रताप विश्वविद्यालय की स्थापना की है। इसके बाद डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय से चार जिले हाथरस, अलीगढ़, कासगंज और एटा के कॉलेज हटकर राजा महेंद्र प्रताप विश्वविद्यालय से संबद्ध हो गए हैं। पूर्व में आम्बेडकर विश्वविद्यालय के द्वारा 100 करोड रुपए राजा महेंद्र प्रताप विश्वविद्यालय को ट्रांसफर किए गए थे। इसका विरोध हुआ था। ढाई सौ करोड रुपए और दिए जाने की चर्चा पर कर्मचारी नेता डॉ. आनंद टाइटलर ने प्रमुख सचिव वित्त को लिखे पत्र में लिखा है कि राजा महेंद्र प्रताप विश्वविद्यालय बनने के बाद डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय में छात्रों की संख्या कम रह गई है। इसके अलावा आगरा और आसपास के जिलों में कई प्राइवेट विश्वविद्यालय खुल गए हैं। जैसे फिरोजाबाद में जेएस, एफएस, आगरा में हेरिटेज, मथुरा में संस्कृति, जीएलए आदि। ऐसे में आगरा विश्वविद्यालय में छात्रों की संख्या में गिरावट आ रही है। आए दिन सैकड़ो की संख्या में छात्र माइग्रेशन लेकर विश्वविद्यालय को छोड़कर भी जा रहे हैं। इससे यहां की आमदनी दिन पर दिन घटती जा रही है। भविष्य में कर्मचारियों को वेतन व पेंशन देने के लिए धनराशि नहीं बचेगी। इसके कारण कर्मचारियों के सैकड़ो परिवार भुखमरी की कगार पर आ जाएंगे। इसलिए यहां के हालातों को देखते हुए किसी भी तरह की धनराशि राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय अलीगढ़ को नहीं भेजी जाए।












