आगरा। न्यू आगरा थाना पुलिस की दी गई दबिश के दौरान अधिवक्ता की हुई मौत के मामले में अधिवक्ता की पत्नी ने देर शाम पुलिस कमिश्नर के नाम से पुलिस कर्मियों के खिलाफ हत्या करने की तहरीर दे दी है। इसमें उन्होंने थानाध्यक्ष न्यू आगरा राजीव कुमार, चौकी प्रभारी दयालबाग अनुराग सिंह और आठ-दस पुलिस वालों पर हत्या का आरोप लगाया है। सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो रहा है। इधर पुलिसकर्मी मुकदमा दर्ज होने से पहले ही फरार हो गए हैं। कई के नंबर बंद आ रहे हैं।
अधिवक्ता सुनील शर्मा अपनी पत्नी के साथ मंगलम आधार अपार्टमेंट में फ्लैट नंबर 801 में रह रहे थे। देर रात पुलिस की एक गाड़ी अपार्टमेंट में आई। चर्चाएं हैं कि गाड़ी में थानाध्यक्ष राजीव कुमार, दरोगा अनुराग सिंह, मांगेराम, अजीत कुमार, सचिन तोमर, एक महिला कांस्टेबल आदि के साथ सवार थे। पुलिस कर्मी ऊपर गए। पुलिस को अधिवक्ता सुनील शर्मा की तलाश थी। कुछ देर बाद अचानक तेज आवाज हुई। लोगों ने निकल कर देखा तो अधिवक्ता जमीन पर पड़े थे। आनन-फानन में पुलिस कर्मी गाड़ी में बैठकर भागने लगे। लोगों ने उन्हें रोक लिया। पुलिसकर्मी उसी गाड़ी से लहूलुहान हालत में पड़े अधिवक्ता सुनील शर्मा को हॉस्पिटल लेकर गए। जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतक के तीनों भाई का इंतजार हो रहा था। शाम को यह सिकंदरा फ्लैट पर पहुंचे। मृतक अधिवक्ता सुनील शर्मा की पत्नी सुनीता की ओर से पुलिस कमिश्नर के नाम से एक तहरीर दी गई है। जिसमें उन्होंने कहा है कि उनके पति को आपराधिक षड्यंत्र के तहत मनोज शर्मा ने फर्जी तरीके से लाभ प्राप्त करने के लिए मुकदमा में फंसा दिया। उनके पति के द्वारा अपनी वेगुनाही के संबंध में थाना न्यू आगरा और पुलिस के उच्च अधिकारियों को साक्ष्य दे दिए गए थे। उनके पति को उच्च अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि तुम्हारे साक्ष्य सही हैं। आवश्यकता पड़ने पर तुम्हें बुला लिया जाएगा। दिनांक एक मार्च को रात करीब 10:45 बजे पुलिस वालों ने मेरा दरवाजा खुलवाया और मुझसे कहा कि अपने पति को थाना न्यू आगरा भेज देना। तुम्हारे पति के खिलाफ मुकदमा दर्ज है। करीब 10 मिनट बाद ही पुलिस वालों ने जबरन मेरे घर का मुख्य द्वार तोड़ दिया तथा मेरे पति को घर के अंदर से जान से मारने की नीयत से गालियां देते हुए बराबर वाले फ्लैट में तेजी से ले गए। इसके साथ ही मुझे फ्लैट में बंधक बना दिया। 5-7 मिनट बाद ही मेरे पति के चीखने की आवाज आई तो मैं शोर मचाते हुए बाहर निकली तो 8-10 पुलिस वाले जिसमें राजीव सिंह, अनुराग सिंह अन्य पुलिस वाले थे, जो की बगल वाले फ्लैट से कमरे में थे, मिलकर मेरे पति को फ्लैट नंबर 802 की बालकनी से नीचे फेंक रहे थे। मेरे शोर करने के बावजूद भी मेरे पति को आठवीं मंजिल से फेंक दिया। जिसके कारण मेरे पति की मृत्यु हो गई। वे मेरे घर में रखे मेरे पति के आवश्यक अभिलेखों को भी साथ ले गए। पुलिस ने अपने बचाव में अपने अपराध के साक्ष्यों को भी नष्ट कर दिया।
सिकंदरा पुलिस को नहीं दी दबिश की सूचना
न्यू आगरा थाना के थानाध्यक्ष पुलिसकर्मियों को लेकर दबिश देने के लिए सिकंदरा क्षेत्र में फ्लैट पर गए थे और संबंधित थाने की पुलिस को उन्होंने सूचना भी नहीं दी थी जबकि उन्हें वहां पर सूचना करनी चाहिए थी। अधिवक्ता को अगर गिरफ्तार ही करना था तो न्यायालय से वारंट भी लिया जा सकता था। मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिसकर्मियों की मुश्किलें बढ़ेंगी।











