लखनऊ। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने जनसंख्या नियंत्रण की कोशिशों के साथ ही जनसंख्या में संतुलन बनाए रखने की जरूरत बताई है। सोमवार को विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर सीएम ने कहा कि ऐसा न हो कि किसी एक वर्ग की आबादी बढ़ने की स्पीड ज्यादा हो, और जो मूल निवासी हों, उनकी आबादी को जागरूकता के प्रयासों से नियंत्रित कर दिया जाए।
सीएम ने कहा कि जिन देशों की जनसंख्या ज्यादा होती है। वहां असंतुलन चिंता का विषय है, क्योंकि रिलीजियस डेमोग्राफी पर उल्टा असर पड़ता है। एक समय के बाद वहां अव्यवस्था और अराजकता जन्म लेने लगती है। उन्होंने कहा कि जब हम परिवार नियोजन की बात करते हैं तो हमें ध्यान में रखना होगा कि जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आगे बढ़े, लेकिन जनसांख्यिकी असंतुलन की स्थिति भी पैदा न होने पाए।
सीएम ने कहा कि जनसंख्या रोकने की कोशिश से सभी मजहब, वर्ग, संप्रदाय को एक समान रूप से जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि एक वर्ग विशेष में मातृ और शिशु मृत्यु दर दोनों ही ज्यादा हैं। अगर दो बच्चों के जन्म के बीच अंतराल कम है तो इसका असर मातृ और शिशु मृत्यु दर पर भी पड़ेगा। इसकी कीमत समाज को भी चुकानी पड़ेगी।
सीएम ने कहा कि इसे रोकने के लिए धर्मगुरुओं का भी सहयोग लिया जाना चाहिए। इसमें सामूहिक कोशिशों से ही सफलता मिलेगी। सीएम ने कहा कि मानव को 100 करोड़ तक होने में लाखों साल लगे, लेकिन 100 से 500 करोड़ होने में 183-185 साल ही लगे। इस साल के अंत तक विश्व की आबादी 800 करोड़ होने की संभावना है। आज का भारत 135-140 करोड़ जनसंख्या का देश है। उत्तर प्रदेश सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है। यहां अभी 24 करोड़ की आबादी है, जो कि कुछ समय में 25 करोड़ की संख्या को पार कर जाएगी। यह स्पीड एक चुनौती है।
सीएम ने कहा कि यूपी में मैटरनल एनीमिया 51.1% से घटकर 45.9% रह गई है। पांच साल में फुल इम्यूनाइजेशन 51.1% से बढकर लगभग 70% तक पहुंच गया है। हॉस्पिटल में प्रसव की दर जो पहले 67-68% थी, वह आज 84% है। मातृ-शिशु मृत्यु दर को कंट्रोल किया गया है।
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