आगरा। जगदीशपुरा में करोड़ों रुपए की जमीन कब्जा कराने वाले मामले में पुलिस मुख्य आरोपियों में से किसी एक को भी पांच दिन में गिरफ्तार नहीं कर सकी है। धमकी देने वाले पहलवान के एक गुर्गे को गुरुवार को जरूर पकड़ लिया गया है, लेकिन उससे कोई भी जानकारी पुलिस को हाथ नहीं लगी है। पकड़े गए अमित का कहना है कि इस साजिश में बड़े लोग शामिल हैं लेकिन वह उनसे कभी नहीं मिला।
बोदला में करोड़ों रुपए की चार बीघा जमीन पर कब्जा कराने के लिए पुलिस ने दो फर्जी मुकदमे लिखे। पहले मुकदमे में रवि कुशवाह, संकरिया और ओमप्रकाश को गांजा में जेल भेजा गया। उसके बाद रवि की पत्नी पूनम और बहन पुष्पा को शराब में जेल भेज दिया गया। मामला डीजीपी तक पहुंचा तो अधिकारियों के होश उड़ गए। तत्कालीन थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार सहित चार पुलिसकर्मी निलंबित किये गए। विवेचक और अन्य पुलिसकर्मियों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार और बिल्डर को पकड़ने के लिए दबिश का खेल चल रहा है।
इधर पीड़ित परिवार से डीसीपी सिटी सूरज कुमार राय ने यह जानने का प्रयास किया कि कौन-कौन उन्हें धमकाने आता था। पूछताछ में अमित अग्रवाल का नाम सामने आया। पीड़ित परिवार ने बताया कि अमित दबंग पुरुषोत्तम पहलवान का साथी है। पुलिस ने फ्रेंड्स कालोनी, शाहगंज निवासी अमित अग्रवाल को पकड़ा लिया लेकिन वह कुछ भी नहीं बता सका। वह सिर्फ यही बोला कि इस खेल में बड़े-बड़े लोग शामिल हैं। डीसीपी सिटी ने बताया कि आरोपित को जान से मारने की धमकी और आपराधिक षड्यंत्र की धारा के तहत गुरुवार को जेल भेज दिया गया। पहलवान, बिल्डर और एसओ की तलाश में टीमें दबिश दे रही हैं।
फर्जी मुकदमे से पहले गांजे का साजिश के तहत वीडियो बनवाया, स्कूटर पर तो नंबर ही नहीं
चर्चा है कि थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार के एक खास सलाहकार से गांजा रखकर बिक्री का वीडियो बनाया। जिसमें यह दर्शाया गया कि मौके पर गांजा बेचा जाता है। गांजा बेचने वालों के चेहरे नहीं दिखाए गए। उसमें रवि और अरुण के नाम लिए गए। यह वीडियो एसआईटी के हाथ लगा है। इसकी जांच शुरू हो गई है। अधिकारी मानकर चल रहे हैं कि वीडियो बनाने का काम किसी ऐसे युवक से कराया गया है जो पेशेवर है। मीडिया से भी जुड़ा हो सकता है। पीड़ित रवि ने पुलिस को बताया कि पुलिस ने उन्हें फंसाने के लिए गहरी साजिश रची थी। पहले एक पैकेट स्कूटर के पायदान से बरामद दिखाया। स्कूटर मैदान में खड़ा था। वह लोग घर के अंदर थे। पुलिस उन्हें थाने ले आई। रात में उन्हें बिचपुरी मार्ग पर ले जाया गया। वहां सफेद रंग की एक स्विफ्ट कार आई। उसके अंदर से दो पैकेट और निकाले गए। उनके हाथ में ब्लेड दिया गया। एक पैकेट फाड़ने को कहा गया। उसमें गांजा था यह उन्हें जेल जाने के बाद पता चला। कार किसकी थी। पुलिस यह भी पता लगा रही है। इधर एक फोटो भी वायरल हो रहा है। जिसमें दिखाई दे रहा है कि जिस स्कूटर पर टिर्री का पुलिस फर्जी नंबर बता रही है उस स्कूटर पर नंबर ही नहीं था।
फरार थानाध्यक्ष पर डकैती की धारा हटाने का आरोप
फरार थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार पर जगदीशपुरा के एक युवक ने डकैती की धारा हटाने का आरोप लगाया है।
अलबतिया रोड के रहने वाले शुभम शिवहरे ने डीसीपी सिटी से मुलाकात कर शिकायत की है कि एक सितंबर 2023 को जगदीशपुरा क्षेत्र में उसके साथ शनि कबाड़िया और उसके चार अज्ञात साथियों ने लूट की घटना को अंजाम दिया था। इसके बाद उन सभी के खिलाफ डकैती सहित अन्य धारा में मुकदमा दर्ज हुआ था। शुभम ने आरोप लगाया है की विवेचना के दौरान पुलिस द्वारा डकैती धारा को हटा दिया गया। इसके लिए तत्कालीन थानाध्यक्ष जगदीशपुरा जितेंद्र कुमार ने सपा नेता के माध्यम से एक लाख 80 हजार रुपए लिए।











