आगरा। आगरा कॉलेज के प्राचार्य को शासन द्वारा निलंबित कर दिया गया है।चर्चाएं हैं कि वित्तीय अनिमितताओं के चलते उन्हें निलंबित किया गया है। कमिश्नर के आदेश पर अंग्रेजी विभाग के डॉ. सीके गौतम को कार्यवाहक प्राचार्य बनाया गया है। जब वह चार्ज लेने के लिए पहुंचे तो प्राचार्य ऑफिस पर ताला मिला। डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी और पुलिस ने चाबी दिलाई। इसके बाद वह अपनी कुर्सी पर बैठ सके।
आगरा कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनुराग शुक्ला की वित्तीय अनियमितताओं सहित कई मामलों में उनकी जांच चल रही थी। सोमवार को शासन द्वारा उन्हें निलंबित किए जाने की खबर तेजी से आई। कमिश्नर दिल्ली में थीं। इसलिए खबर की पुष्टि नहीं हो सकी। मंगलवार को उनके निलंबित होने की पुष्टि हो गई। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी के द्वारा डॉ. सीके गौतम को फोन कर कमिश्नरी में बुलाया गया। कमिश्नर के निर्देश पर अपर आयुक्त राजेश कुमार के द्वारा उन्हें कार्यवाहक प्राचार्य बनाया गया। यहां पर कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद साथी शिक्षकों के साथ वह कॉलेज में चार्ज लेने के लिए पहुंचे। यहां पर प्राचार्य ऑफिस पर ताला लगा हुआ था। नवागत प्राचार्य डॉ. सी के गौतम का कहना है कि जब डॉ. अनुराग शुक्ला से प्राचार्य ऑफिस की चाबी मांगी गई तो उन्होंने मना कर दिया और कहा कि मेरे वकील से बात कीजिए। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी ने भी चाबी मांगी तो नहीं दी। सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस के द्वारा प्राचार्य अनुराग शुक्ला से चाबी लाकर नवागत प्राचार्य डॉक्टर सीके गौतम को दी गई। लेकिन ऑफिस के बराबर में बने कार्यालय की चाबी फिर भी नहीं मिली। नवागत प्राचार्य डॉ सीके गौतम थोड़ी देर के लिए अपने ऑफिस में बैठे और चले गए। इधर डॉ. अनुराग शुक्ला से भी उनका पक्ष जानने के लिए फोन मिलाया गया लेकिन उनका फोन नहीं उठा।
उच्च शिक्षा मंत्री भी एक बार नाराज होकर चले गए थे
आगरा कॉलेज प्राचार्य की ओर से एक बार उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय को किसी कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था। जब वह कॉलेज के गेट पर पहुंचे तो चपरासी ने दरवाजा नहीं खोला। प्राचार्य को सूचना दी गई थी तो वह भी दरवाजा नहीं खुलवा सके थे। इसके बाद उच्च शिक्षा मंत्री बिना कार्यक्रम में शामिल हुए नाराज होकर गेट से ही लौट गए थे।











