आगरा। आगरा में मिट्टी और बालू का खनन बंद होने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले दिनों एक सिपाही को खनन माफिया ने गोली मारी थी उसके बाद भी पुलिस खनन को लेकर आंखें बंद किए हुए हैं। बुधवार को बरहन कस्बे के गांव अमानाबाद में अवैध रूप से मिट्टी खनन चल रहा था। पोकलेन मशीन से खुदाई के बाद डंपरों से मिट्टी ले जाई जा रही थी। खनन विभाग की टीम ने मौके पर छापा मार कर सात डंपर पकड़े। खनन विभाग के छापा मारने के बाद थाना पुलिस यह कहकर लीपापोती करने लगी कि ठेकेदार ने कहा था कि उसके पास अनुमति है।
गांव अमानाबाद व नगला नत्था के बीच रेलवे की अनुमति के नाम पर मिट्टी खनन चल रहा था। चर्चाओं को सही मानें तो पुलिस को पहले दिन से इसकी जानकारी थी। पुलिस ने इस तरफ से आंखें बंद कर रखी थीं। पुलिस के मुताबिक ठेकेदार कहता था कि उसके पास अनुमति है। सवाल यह है कि पुलिस ने कागजात चेक करने के लिए खनन विभाग की टीम को क्यों नहीं बुलाया? इधर अवैध खनन की शिकायत खनन अधिकारी से हुई थी। जिला खनन अधिकारी मिथिलेश पांडेय अपनी टीम के साथ अमानाबाद पहुंचे थे। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने मिट्टी डालने की अनुमति मांगी तो ठेकेदार दिखाने में असमर्थ रहा। उसने अधिकारियों क़ो गुमराह करने का प्रयास किया। कहा कि उसके पास बरहन से मलावन-एटा के लिए जाने वाली रेलवे लाइन के लिए मिट्टी डालने की अनुमति है। मांगे जाने पर वह अनुमति नहीं दिखा सका। कागज दिखा देगा यह कहकर खनन विभाग की टीम को समझाने के प्रयास में जुटा रहा। जिला खनन अधिकारी मिथिलेश पांडेय ने बताया है कि सात डम्परों क़ो सीज कर दिया गया है। खनन चालू स्थिति में नहीं मिला था। इसलिए पोकलेन मशीन को सीज नहीं किया गया है। ठेकेदार अपने पास अनुमति की बात कर रहा है। उससे कागजात मांगे गए हैं। जानकारी की जाएगी कि किस गाटा संख्या की अनुमति है और मिट्टी का उठान किस गाटा संख्या से किया जा रहा है। ग्रामीणों की मानें तो लंबे समय से यहां खनन हो रहा है। थाना पुलिस को सब पता था। बिना पुलिस की मर्जी से पोकलेन मशीन से खनन हो जाए इसका प्रश्न ही नहीं उठता। सूत्रों की मानें तो पूर्वी और पश्चिमी जोन के कई थाना क्षेत्र में जमकर खनन चल रहा है।











