आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के 92 वें दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने 64 मेधावियों को 88 पदक से सम्मानित किया। पदक पाकर उनके चेहरे खिल उठे। आरबीएस कॉलेज के नरेंद्र सिंह को सर्वाधिक चार गोल्ड मेडल मिले। समारोह में 79,832 छात्रों को डिग्री मिली। इसमें यूजी के 55,686, पीजी के 9150 प्रोफेशनल कोर्स के 14826, पीएचडी के 167, डीलिट के तीन शोधार्थी शामिल हैं।
कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने अपने उद्बोधन में शिक्षा के साथ संस्कार पर जोर दिया। कहा कि जंतर मंतर पर जो कुछ हुआ हमने देखा है। कुछ बच्चों की गलत हरकत के कारण माहौल खराब हुआ। वह बच्चे पढ़े लिखे थे लेकिन उनमें संस्कार नहीं था। मेडल मिलने वाले छात्रों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि अब डिजिलॉकर में डिग्री अपलोड होने के बाद विश्वविद्यालय और कॉलेज द्वारा प्रकाशित कर नहीं दी जाएगी। छात्रों को डिजिलॉकर से ही डिग्री डाउनलोड करनी होगी। डिग्री मिलने के बाद अब यह छात्रों की जिम्मेदारी है कि वह समस्या के समाधान के लिए काम करें। एक दो फीसदी ऐसे लोग हैं जो कमियां देखते हैं इन पर ध्यान ना दें। ऐसे ही लोग जंतर मंतर पर प्रदर्शन करते हैं।
एनसीईटी के चेयरमैन प्रो. पंकज अरोरा ने कहा यह दीक्षांत समारोह है शिक्षांत नहीं है। उच्च शिक्षा में नारी शक्ति की बढ़ती भागीदारी महिला सशक्तीकरण का सशक्त प्रमाण है। आज लगभग 25 करोड़ विद्यार्थी भारत के विभिन्न विद्यालयों में और 25 करोड़ विद्यार्थी स्कूल एजुकेशन सिस्टम को विश्व का सबसे बड़ा औपचारिक शिक्षा का आधार बनाते हैं। अब चरित्र आपकी पहचान बनेगा। ऐसी सफलता का लक्ष्य बनाएं जो समाज राष्ट्र मानवता के लिए काम करे। जंतर मंतर पर जो हुआ, उसका तरीका समाज राष्ट्र और मानवता के लिए कार्य करने के अलावा कुछ अलग हो गया। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने जेन जी के जंतर मंतर पर हुए आंदोलन पर तंज कसते हुए कहा कि उच्च शिक्षा प्राप्त करना ही एकमात्र लक्ष्य नहीं होना चाहिए। संस्कार सहित शिक्षा ही जरूरी है। इसका दायित्व शिक्षक और विद्यार्थियों पर समान रूप से है। उन्होंने कहा कि संस्कार विहीन शिक्षा जंतर मंतर देती है। उन्होंने जंतर मंतर पर आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि यह कैसी शिक्षा थी, जिसमें विद्यार्थी देश के महान सपूतों और शीर्ष स्थान पर बैठे राजनेताओं को गाली दे रहे थे। यहां तक कि इसमें बेटियां भी इसमें शामिल थीं। ऐसी घटनाओं से सभी शर्मसार हो रहे थे। इसके लिए आने वाले समय में संस्कार सहित उच्च शिक्षा जरूरी है।
कुलाधिपति ने कहा, “मैं भी किसान की बेटी हूं
आगरा। भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में दो स्वर्ण पदक जीतने वाली फिरोजाबाद की प्रतिभा के पिता श्याम सुंदर से राज्यपाल ने आत्मीय बातचीत की। जब राज्यपाल ने उनसे पूछा कि वे क्या करते हैं, तो श्याम सुंदर ने बताया कि वे किसान परिवार से हैं। इस पर राज्यपाल ने कहा, “मैं भी किसान की बेटी हूं।” उन्होंने श्याम सुंदर की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी बेटी को पढ़ाकर इस मुकाम तक पहुंचाया है, यह बेहद प्रेरणादायक और प्रशंसनीय कार्य है। राज्यपाल ने प्रतिभा और उसके परिवार को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं।











