मुंबई/आगरा। महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पेपर लीक मामले में आगरा से तार जुड़ गए हैं। महाराष्ट्र पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) के अनुसार टीईटी का प्रश्नपत्र आगरा स्थित एक प्रेस में मुद्रित हुआ था और कथित तौर पर इसी प्रिंटिंग प्रेस से कुछ कर्मचारियों द्वारा प्रश्नपत्र लीक किया गया। जांच में आगरा निवासी इसी प्रेस के पूर्व कर्मचारी सोनू कुमार दिवाकर की भूमिका सामने आई है। आरोप है कि उसने प्रिंटिंग प्रेस में कार्यरत तीन अन्य कर्मचारियों की मदद से गोपनीय प्रश्नपत्र हासिल कर उसे लीक नेटवर्क से जुड़े लोगों तक पहुंचाया। पेपर लीक की पुष्टि के बाद महाराष्ट्र सरकार ने टीईटी परीक्षा रद्द कर दी थी।
एसआईटी की जांच में सामने आया कि आगरा में प्रश्नपत्र की छपाई और पैकिंग प्रक्रिया से जुड़े कुछ कर्मचारियों ने कथित तौर पर सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाई। पुलिस ने इस मामले में सोनू कुमार दिवाकर समेत प्रिंटिंग प्रेस के तीन अन्य कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार इन कर्मचारियों की पहुंच प्रश्नपत्र की छपाई प्रक्रिया तक थी और आरोप है कि इन्होंने गोपनीय प्रश्नपत्र को प्रेस से बाहर निकालने में मदद की। जांच के अनुसार सोनू कुमार दिवाकर पहले महिम पत्रन प्राइवेट लिमिटेड में काम कर चुका था। नौकरी छोड़ने के बाद भी उसके प्रेस में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों से संपर्क बने रहे। आरोप है कि इसी संपर्क का इस्तेमाल कर उसने प्रश्नपत्र हासिल किया और उसे परीक्षा लीक गिरोह तक पहुंचाया। एसआईटी की जांच में सोनू दिवाकर का नाम सामने आने के बाद उसकी तलाश की गई। बाद में उसने भिवंडी अदालत में आत्मसमर्पण किया, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की। जांच एजेंसी के अनुसार प्रश्नपत्र को सुरक्षित प्रिंटिंग प्रक्रिया से बाहर निकालने के लिए कर्मचारियों ने कथित तौर पर चतुराई भरा तरीका अपनाया। पुलिस का दावा है कि प्रश्नपत्र को जूते के सोल में छिपाकर प्रिंटिंग प्रेस से बाहर निकाला गया और इसके बाद उसे लीक नेटवर्क के जरिए आगे पहुंचाया गया। एसआईटी अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र प्रेस से बाहर आने के बाद किन-किन लोगों तक पहुंचा और कितने अभ्यर्थियों को इसका लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। जांच में सामने आया है कि लीक प्रश्नपत्र कथित तौर पर मुख्य आरोपी बिजेंद्र कुमार गुप्ता तक पहुंचाया गया। पुलिस ने बिजेंद्र गुप्ता को बिहार से गिरफ्तार किया था। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ा और आगरा की प्रिंटिंग प्रेस से जुड़े कर्मचारियों तथा सोनू दिवाकर की भूमिका सामने आई।










