आगरा। सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज में मीना ने अपने पति की जिंदगी बचाने के लिए अपनी एक किडनी दान की। ट्रांसप्लांट के दूसरे दिन मीना की हालत पूरी तरह स्थिर है और वह तेजी से स्वस्थ हो रही हैं। डॉक्टरों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है। सफल ट्रांसप्लांट के बाद अब दोनों की सेहत में सुधार होना परिवार के लिए बड़ी राहत की बात है। मीना ने अपने पति से वीडियो कॉल पर भी बातचीत की।
हाथरस के रहने वाले महेंद्र कुशवाहा निजी स्कूल में पढ़ाते हैं। डेढ़ साल पहले दोनों किडनी खराब होने की उन्हें जानकारी मिली। वह लगातार डायलिसिस करा रहे थे। डायलिसिस के लिए पत्नी मीना खुद उन्हें लेकर मेडिकल कॉलेज लाती थी। दोनों के तीन बच्चे भी हैं। मीना ही उन्हें संभालती थी। मीना ने पति को चिकित्सकों को दिखाकर अपनी किडनी देने का फैसला लिया। 22 अगस्त के बाद से ही दोनों भर्ती हैं। ट्रांसप्लांट के बाद संक्रमण से बचाव और मेडिकल गाइडलाइंस के कारण मीना को फिलहाल कुछ दिनों तक अपने पति से सीधे मिलने की अनुमति नहीं है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन ने दोनों की वीडियो कॉल के जरिए बातचीत कराई। वीडियो कॉल पर आमने-सामने आए पति-पत्नी ने एक-दूसरे का हालचाल जाना। कुछ देर की इस बातचीत ने अस्पताल के माहौल को भी भावुक कर दिया। जिस पत्नी ने अपने पति को जीवन देने के लिए अपनी किडनी दान की, वही अब उनसे दूर रहकर उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रही है। वहीं पति के लिए भी पत्नी का यह त्याग किसी अनमोल उपहार से कम नहीं है। इलाज के दौरान मीना ने सफल ऑपरेशन और असाध्य रोग योजना के तहत मिले निःशुल्क इलाज के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, एसएनएमसी के प्राचार्य एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता तथा पूरी चिकित्सकीय टीम का विशेष आभार व्यक्त किया। मीना ने कहा कि अस्पताल की चिकित्सकीय टीम ने जिस तरह से उनका और उनके पति का उपचार किया, उससे उन्हें काफी हिम्मत मिली। सफल ऑपरेशन के बाद परिवार के लिए सबसे बड़ी खुशी यह है कि दोनों की हालत में लगातार सुधार हो रहा है। एसएनएमसी के प्राचार्य एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट के बाद मरीज और दाता दोनों के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि मेडिकल टीम दोनों की स्थिति पर 24 घंटे नजर बनाए हुए है। दोनों की रिकवरी तेजी से हो रही है और फिलहाल दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं। डॉ. गुप्ता ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में इस तरह के जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देना और मरीजों को नया जीवन देना संस्थान की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने पूरी ट्रांसप्लांट टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मरीज और दाता दोनों की सुरक्षित रिकवरी सबसे महत्वपूर्ण है। एसएनएमसी में हुआ यह सफल किडनी ट्रांसप्लांट चिकित्सा उपलब्धि के साथ-साथ पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास और त्याग की ऐसी कहानी भी सामने लाता है, जिसने इलाज के बीच मानवीय संवेदनाओं को खास बना दिया है।











