आगरा। डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय में सहायक कुलसचिव के ऑफिस के दरवाजे पर प्रवेश वर्जित छात्र नेता एबीवीपी का पर्चा लगाया गया। इस मामले में डीएलए द्वारा प्रमुखता से खबर प्रकाशित की गई। खबर को उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने गंभीरता से लिया। योगेंद्र उपाध्याय ने तत्काल एक बड़े अधिकारी को फोन किया और उनसे पूछा कि यह क्यों और किसने लगाया है। अधिकारी ने उन्हें बताया कि एक अन्य अधिकारी के द्वारा यह लगाया गया है, उनकी भी जानकारी में यह मामला अभी आया है। उच्च शिक्षा मंत्री के फोन के बाद अधिकारी द्वारा तत्काल प्रभाव से उस पर्चे को हटवा दिया गया है।
बता दें कि आज दोपहर में सहायक कुलसचिव परीक्षा के ऑफिस के दरवाजे पर एक पर्चा लगाया गया, जिस पर लिखा हुआ था प्रवेश वर्जित छात्र नेता एबीवीपी। मामले में डीएलए ने समाचार प्रकाशित किया। इधर सपा छात्र सभा और एनएसयूआई पदाधिकारियों द्वारा चुटकी ली जा रही थी। वह बोल रहे थे कि भाजपा सरकार में ही उनके ही संगठन का विश्वविद्यालय में प्रवेश वर्जित हो गया है। इधर उच्च शिक्षा मंत्री ने जैसे ही डीएलए में प्रकाशित खबर पढ़ी, उन्होंने तत्काल प्रभाव से एक जिम्मेदार अधिकारी को फोन किया, उनसे पूछा कि यह क्यों लगाया गया है? अधिकारी ने उन्हें बताया कि एक अन्य अधिकारी द्वारा यह लगाया गया है। अधिकारी द्वारा उन्हें भी जानकारी नहीं दी गई थी। मैं इसे एक मिनट के अंदर ही हटवा रहा हूं। इसके बाद तुरंत ही इसे हटवा दिया गया। इधर विद्यार्थी परिषद में इस बात को लेकर आक्रोश है कि उनकी बदनामी क्यों की गई। पदाधिकारी हंगामा करने पहुंच रहे हैं।










