आगरा। आगरा कमिश्नरेट में गजब का मामला सामने आया है। जिस मामले में इंस्पेक्टर खुद आरोपों के घेरे में हैं, उसमें उनसे ही रिपोर्ट मांगी जा रही है कि इस कांड में कौन-कौन दोषी हैं। सवाल खड़े हो रहे हैं कि कोई भी अपनी रिपोर्ट में यह कैसे लिख कर दे देगा कि उसकी भी संलिप्तता है।
जनकपुरी आयोजन के दौरान दिल्ली के चार टप्पेबाज पकड़े गए थे। उन्होंने एक मोबाइल व्यापारी को साढ़े तीन लाख रुपये का सोना बेचा था। सोना टप्पेबाजी का था। कोतवाली क्षेत्र में एक व्यापारी के यहां गलवाकर लाए थे। मोबाइल व्यापारी ने टंच कराया तो सोने की शुद्धता कम थी। पुलिस के कहने पर व्यापारी ने टप्पेबाजों को बहाने से बुलाया था। पुलिस टप्पेबाजों को शाहगंज डिवीजन चौकी पर ले गई थी। रातभर वहां रखा था। उसके बाद चारों को छोड़ दिया था। उनसे पूछताछ के बाद कोतवाली से भी एक सराफ को उठाया था। उसे भी फील गुड के बाद छोड़ा गया था। इस मामले की शिकायत अधिकारियों से हुई थी। डीसीपी सिटी सूरज कुमार राय ने गुरुवार को इस मामले में प्रशिक्षु दरोगा शुभम सिंह, सिपाही प्रशांत और संजीव अत्री को निलंबित किया था। थाने से मिली रिपोर्ट के आधार पर तीनों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। शुक्रवार को डीसीपी सिटी सूरज कुमार राय के समक्ष पेश हुए। बताया जा रहा है कि तीनों ने घटना के संबंध में जो हुआ था विस्तार से उन्हें बताया। पुलिस महकमे में चर्चा है कि जिनके खिलाफ कार्रवाई हुई वह तो मोहरा हैं। इंस्पेक्टर और चौकी प्रभारी दोनों को घटना की जानकारी थी। चौकी प्रभारी ने पुलिसकर्मियों को मौके पर भेजा था। पुलिसकर्मी टप्पेबाजों को चौकी पर बैठाकर दूसरे काम से चले गए थे। कोतवाली थाने में तैनात एक सिपाही को फोन किया गया था। वह उस सराफ को शाहगंज तक लेकर आया था जिसने सोना गलाया था। टप्पेबाज छोड़ दिए। सोना कहां गया यह बात पहेली बनी हुई है। इधर चर्चाएं चल रही हैं कि अधिकारियों ने इंस्पेक्टर से ही मामले में रिपोर्ट मांगी थी। इंस्पेक्टर ने ही प्रशिक्षु दरोगा और दो कांस्टेबल के नाम अपनी रिपोर्ट में दिए। इसके बाद यह निलंबित किए गए। जबकि इंस्पेक्टर खुद सवालों के घेरे में हैं। चर्चाएं यह भी हैं कि सीता का डोला निकलवाने की कहकर इंस्पेक्टर और चौकी प्रभारी अपना बचाव कर रहे हैं जबकि जिस दिन टप्पेबाज पकड़े गए थे, उस दिन सीता का डोला निकला ही नहीं था। इस बात की भी जांच शुरू हो गई है।










