आगरा। आगरा कमिश्नरेट में एक थानाध्यक्ष का थैला प्रकरण कई महीने से सुर्खियों में छाया हुआ है। एसीपी की जांच का सभी इंतजार कर रहे थे। इंतजार खत्म हो गया है। एसीपी ने अपनी जांच में थानाध्यक्ष को दोषी माना है। उन्होंने गाड़ी भेजने वाले दरोगा और थैला ले जाने वाले कांस्टेबल को भी दोषी माना है। सूत्रों का कहना है कि एसीपी की रिपोर्ट पर डीसीपी पूर्वी ने 14 (1) की विभागीय कार्रवाई शुरू करा दी है। 14( 1) की कार्रवाई दीर्घ दंड में आती है। इसमें न्यूनतम वेतन से लेकर बर्खास्तगी तक की कार्रवाई होती है। आने वाले समय में थानाध्यक्ष की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उनकी आय से अधिक संपत्ति की जांच कराई जा सकती है।
बता दें कि एक रील वायरल हुई थी, जिसमें गाड़ी के डैशबोर्ड पर नोटों की कई गड्डियां पड़ी हुई दिखाई दे रही थीं। गाना बज रहा था छोरी चिल्लावे पैसा ही पैसा। चर्चाएं थी कि थानाध्यक्ष अनिल शर्मा का कारखास बैग लेकर गया था, उसमें से कुछ गड्डियां निकाल कर डैशबोर्ड पर रखी गई थी और रील बनाई गई थी। मामला सुर्खियों में आने के बाद पुलिस कमिश्नर ने एसीपी फतेहाबाद आनंद पांडे को जांच दी थी। एसीपी फतेहाबाद आनंद पांडे की जांच में यह सामने आया था कि दरोगा नितिन की गाड़ी को कारखास सुमित गुर्जर और एक प्राइवेट व्यक्ति सतीश ले गए थे। दरोगा ने बयान में बताया था कि कांस्टेबल उनकी गाड़ी मांगने आया था और कहा था कि थानाध्यक्ष का यह थैला एनसीआर क्षेत्र में जाना है। दरोगा ने जब पूछा इसमें क्या है तो उसने बताया था इसमें 27 लाख रुपए हैं। यही देने के लिए जा रहा हूं। उसने अपनी गाड़ी यह सोच कर दे दी कि वह नहीं देंगे तो थानाध्यक्ष बुरा मान जाएंगे। इधर थानाध्यक्ष को एसीपी ने बयान देने के लिए बुलाया और पूछा कि आपने थैला भेजा था या नहीं? इस पर उन्होंने कहा था कि उन्होंने थैले में अपने रिश्तेदारों के पास कपड़े भेजे थे। तत्कालीन एसीपी ने कहा कि भला ऐसे कैसे हो सकता है यहां से कपड़े एनसीआर में भेजे जा रहे हैं। इसका उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया था और अधूरा जवाब देने के बाद वहां से चले गए थे। एसीपी आनंद पांडे ने उनको नोटिस देकर उनसे उन रिश्तेदारों का नाम पूछा था जिनके पास थैला गया था। वह यहीं तक जांच कर पाए थे। इसी दौरान डीसीपी ने अपना तबादला होने वाले दिन जांच एसीपी पिनाहट अमरदीप सिंह को दे दी। जांच बीच में ही चेंज होने को लेकर तमाम सवाल खड़े हुए थे। इधर एसीपी पिनाहट ने जांच में थानाध्यक्ष को दोषी माना गया है। इनके दोषी माने जाने को लेकर यह कहना गलत नहीं होगा कि थैले में पैसे नहीं गए थे। अगर पैसे नहीं गए होते तो वह दोषी नहीं माने जाते। पैसे गए हैं। इसलिए वह दोषी माने गए हैं। एसीपी ने उन दोनों पुलिसकर्मियों को भी दोषी माना है। दरोगा ने अपनी गाड़ी भेजी थी और कांस्टेबल थैला लेकर गया था। एसीपी की रिपोर्ट पर डीसीपी पूर्वी रवि कुमार ने दीर्घ दंड में जांच शुरू करा दी है। इसमें बर्खास्तगी तक की कार्रवाई होती है। आने वाले समय में थानाध्यक्ष की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इधर 14(1) की विभागीय जांच ईमानदार छवि के एसीपी फतेहाबाद गिरीश कुमार सिंह को दी गई है।
गाड़ी भेजने वाले पर सबसे बड़ी कार्रवाई हुई थी, थैला भेजने वाले पर नाम मात्र की
आगरा। गाड़ी भेजने वाले दरोगा पर निलंबन की बड़ी कार्रवाई की गई थी। थैला ले जाने वाले कांस्टेबल को लाइन हाजिर किया गया था। जबकि थैला भेजने वाले थानाध्यक्ष अनिल शर्मा को अपराध शाखा में भेज दिया गया था। उन्हें बस चार्ज से ही हटाया गया था। इस बात को लेकर भी यह सवाल खड़े हो रहे थे कि जिसने थैला भेजा है उस पर बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। अन्य पर कैसे हो गई? एसीपी पिनाहट की जांच में दोषी पाए जाने के बाद एक बार फिर से मामला सुर्खियों में छा गया है। एसीपी पिनाहट अमरदीप सिंह ने बताया कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट में थानाध्यक्ष और दोनों पुलिसकर्मियों को दोषी माना है। रिपोर्ट डीसीपी पूर्वी को दे दी है।











