आगरा। आगरा नगर निगम में भ्रष्टाचार चरम पर छाया हुआ है। करोड़ों रुपए के बड़े-बड़े टेंडरों में बड़े घोटाले हो रहे हैं। बड़े स्तर के अधिकारियों तक पैसा पहुंचने के बाद यह सब खेल हो रहे हैं। एक मामला जब मेयर हेमलता दिवाकर कुशवाहा तक पहुंचा तो वह भी हैरान हो गईं। 11 पैसे कम करके बिड लगाकर एक बिल्डर को टेंडर दे दिया गया है। मेयर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए फाइल तलब की है। इसके बाद निगम में खलबली मच गई है।
अमृत 2.0 (पार्क एवं ग्रीन स्पेस) योजना के तहत नगर निगम ने यमुना किनारा रोड और पालीवाल पार्क के सौंदर्यीकरण के लिए क्रमशः 3.46 करोड़ रुपये और 4.11 करोड़ रुपये के दो अलग-अलग टेंडर निकाले थे। पहले राउंड में कोई बोली नहीं आई। फिर दोबारा टेंडरिंग की गई। इस प्रक्रिया में कुल चार निविदाएं प्राप्त हुईं, जिनमें से एक को ही अर्ह पाया गया। तीसरे प्रयास में तीन कंपनियों ने हिस्सा लिया। इसमें से मैसर्स डीके कंस्ट्रक्शन और मैसर्स सरन एंड कंपनी को तकनीकी आधार पर बाहर कर दिया गया और टेंडर सीधे विनोद एंटरप्राइजेज को दे दिया गया। खास बात यह है कि विनोद एंटरप्राइजेज की बिड केवल 0.11 पैसे कम थी, जिससे सवाल खड़े हो गए हैं। दिल्ली की मैसर्स सरन एंड कंपनी ने आरोप लगाया कि उनकी कंपनी ने सभी तकनीकी और वित्तीय योग्यताएं पूरी की थीं, फिर भी उन्हें जानबूझकर प्रक्रिया से बाहर किया गया। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष मूल्यांकन होता तो वे टेंडर के योग्य थे।
महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाहा ने नगरायुक्त को पत्र में लिखा है कि नगर निगम को किसी भी प्रकार का वित्तीय नुकसान न हो, इसका ध्यान रखते हुए तत्काल जांच की जाए। साथ ही शिकायतकर्ता फर्म द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्षता से समीक्षा कर तीन दिन में पूरी रिपोर्ट सौंपी जाए। इधर चर्चाएं यह भी हैं कि इस पूरी प्रक्रिया में एक कंप्यूटर ऑपरेटर भी शामिल रहा है।











