आगरा। सदर क्षेत्र में मंदिर और मजार के मामले में पुलिस के पार्टी बनने पर हालात बिगड़ते-बिगड़ते बचे। जिस बुंदू कटरा चौकी प्रभारी शक्ति राठी की वजह से तनाव के हालात बने, वह पहले भी कई बार अपनी कार्यशैली को लेकर सुर्खियों में रहा है। फिर भी उसे बड़ी-बड़ी चौकियां मिलती रही हैं। विभाग में चर्चा है कि इस बार भी वह शासन के निर्देश पर निलंबित हुआ है। सवाल यह खड़े हो रहे हैं कि आखिर पहले से विवादित दरोगा को इतनी बड़ी चौकी मिल कैसे गई?
सेवला जाट के राधा कुंज कॉलोनी निवासी दीपक के मुताबिक उनके घर के पास 10 फीट चौड़ी और 10 फीट लंबाई में जमीन है। वहां उनके दादा के समय से देवस्थान बना है। दादा के मिलने वाले हबीब शाह वहां आते थे। 2021 में उनका इंतकाल हो गया। यहां पर साफ सफाई कर भगवा रंग करने के साथ ही हनुमान जी की मूर्ति स्थापित कर दी गई थी। दीपक ने बताया कि हबीब खान पक्ष के फिरोज ने मामले की पुलिस में शिकायत कर दी आरोप लगाया की मजार से छेड़छाड़ की गई है। आरोप है कि सदर पुलिस ने दबाव डालकर हनुमान जी की प्रतिमा को हटवाकर परिवार वालों से भगवा रंग पर हरा रंग करा दिया। सोशल मीडिया पर मामला सुर्खियों में आने के बाद रात 2:00 बजे फिर से पुलिस पहुंच गई और फिर से भगवा पेंट करा दिया गया और मूर्ति रखवा दी। मामला शासन तक पहुंचने के बाद तूल पकड़ गया। शासन के हस्तक्षेप के बाद बिंदु कटरा चौकी प्रभारी शक्ति राठी को निलंबित किया गया है। दरोगा शक्ति राठी चंद साल की नौकरी में ही कई बार विवादों में रह चुके हैं। 2021 में अलीगढ़ में जहरीली शराब की वजह से 100 से ऊपर लोगों की मृत्यु हुई थी। सर्वाधिक लोग जट्टारी क्षेत्र में मरे थे। शक्ति राठी वहां चौकी प्रभारी थे। शासन के कड़े रूख के बाद तत्कालीन एसएसपी ने उन्हें और अन्य पुलिसकर्मियों को निलंबित किया था। इसके बाद शक्ति राठी आगरा में तबादला होकर आ गए। यहां पर जगदीशपुरा जमीन कांड में भी वह सुर्खियों में छाए रहे। रवि कुशवाहा की पत्नी पूनम ने रवि के जेल जाने के बाद अधिकारियों को एक प्रार्थना पत्र दिया था। यह प्रार्थना पत्र जांच के लिए दरोगा शक्ति राठी को मिला। 100 दिन तक प्रार्थना पत्र को अपने पास लटकाए रहे। उन्होंने प्रार्थना पत्र देने वाली पूनम से भी संपर्क नहीं किया। इससे परिवार को धमकी देने वाले दबंगो के हौसले बढ़ते रहे। एक उदाहरण और जब देखने को मिला जब एक व्यक्ति पहले से ही शाहगंज थाने में जेल में बंद था और उसे वह जगदीशपुरा में एक मामले में फरार दिखा रहे थे। उनका कहना था कि जब घर में दबिश दी गई तो वह भाग गया। जेल में बंद व्यक्ति आखिर कैसे भाग गया? यह सवाल न्यायालय ने भी खड़े किए थे। यहां भी दरोगा की योग्यता को पुलिस अधिकारी परख नहीं पाए और बुंदू कटरा जैसी बड़ी चौकी उन्हें थमा दी गई।











