आगरा। वारंटी महिला को थाने में थर्ड डिग्री दिए जाने के मामले में कोर्ट से मुंह की खाने के बाद बेशक तीन दरोगाओं व एक महिला कांस्टेबल के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया है लेकिन आरोपी पुलिसकर्मियों को अभी थाने से नहीं हटाया गया है। इसके साथ ही ना तो उनका निलंबन हुआ है ना ही लाइन हाजिर की कार्रवाई। पीड़ित पक्ष का भी कहना है कि पुलिसकर्मी थाने में मौजूद रहेंगे ऐसे में निष्पक्ष विवेचना नहीं हो पाएगी। वह सीबीसीआईडी में विवेचना ट्रांसफर के लिए मांग करेंगे। इधर अभी तक विभाग में लाइन हाजिर की कार्रवाई तो सुनी थी लेकिन थाना हाजिर की कार्रवाई पहली बार प्रकाश में आ रही है। नीलेश शर्मा फैक्ट्री एरिया पर चौकी प्रभारी थे उनकी थाने पर आमद हो गई है। मतलब कि उन्हें थाना हाजिर कर दिया गया है।
रुनकता निवासी सीमा सिकरवार को पुलिस ने चार जून को पकड़ा था। कोर्ट से उसका वारंट जारी हुआ था। पांच जून को उसे कोर्ट में पेश किया गया। अधिवक्ताओं ने महिला से मारपीट का आरोप लगाया। कोर्ट ने पैनल से मेडिकल के आदेश दिए। पुनः मेडिकल भी हुआ। छह जून को दोनों मेडिकल रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की गईं। पहली रिपोर्ट में चोटों का उल्लेख नहीं था। जबकि दूसरी रिपोर्ट में तीन चोटों का जिक्र था। पुलिस पर मारपीट के गंभीर आरोप लगे। कोर्ट ने मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। पुलिस आदेश के खिलाफ सत्र न्यायालय में गई। सत्र न्यायालय में पुलिस का रिवीजन खारिज हो गया। गुरुवार देर रात सिकंदरा थाने में मुकदमा भी दर्ज हो गया है। कोर्ट के आदेश पर मारपीट, चोरी, तोड़फोड़ और अपमानित करने की धारा के तहत मुकदमा लिखा गया है। मुकदमे में दरोगा नीलेश शर्मा, दरोगा सुरजीत सिंह, दरोगा नेहा व मुख्य आरक्षी सीमा नामजद हैं। हैरानी की बात यह है कि मुकदमा लिखा जाने के बाद भी चारों को थाने से हटाया नहीं गया है। आरोपित नीलेश शर्मा चौकी इंचार्ज फैक्ट्री एरिया थे। थाना प्रभारी के आदेश पर उन्होंने चौकी छोड़ दी। सिकंदरा थाने में अपनी आमद करा ली। चारों पुलिस कर्मी उसी थाने में तैनात हैं जिस थाने में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि चारों के थाने में तैनाती के चलते निष्पक्ष विवेचना संभव नहीं है। इधर यह मामला सोशल मीडिया पर भी सुर्खियों में बना हुआ है। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता डॉ. अजीत कुमार सिंह का कहना है कि इस मामले में आरोपित पुलिस कर्मियों को तत्काल प्रभाव से पहले निलंबित किया जाना चाहिए।
जिस जमीन को लेकर विवाद का मामला है वह करोड़ों की है
सीमा सिकवार को पुलिस ने चार जून को पकड़ा था। तीन जून को रुनकता में दरोगा सुरजीत सिंह फोर्स के साथ एक मुकदमे की विवेचना के सिलसिले में नक्शा बनाने गए थे। उस दौरान महिलाओं ने हंगामा किया था। उनका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया था। दूसरे दिन चार जून को पुलिस ने पूरी तैयारी के साथ घेराबंदी की। सीमा सिकरवार को शाहगंज थाने के एक वारंट में गिरफ्तार किया। पूरा मामला एक महिला वारंटी को पकड़ने का नहीं है। असली खेल करोड़ों की जमीन का है। सीमा सिकवार की एक बहन कथित रूप से मंदबुद्धि है। वर्ष 2013 में सीमा पक्ष ने मूलत: बाह निवासी भदौरिया को एक दुकान किराए पर दी थी। जो कई साल बाद खाली करा ली गई। बाद में परिजनों को पता चला कि भदौरिया पक्ष ने कथित रूप से मानसिक रोगी युवती से भूखंड का बैनामा करा लिया है। इस मामले में फरवरी माह में दुकान खोलने को लेकर दोनों पक्षों में मारपीट हुई थी। पुलिस ने अपनी तरफ से मुकदमा लिखा था। शांतिभंग में कार्रवाई की गई थी। विपक्षी पक्ष ने कोर्ट के आदेश पर सीमा सिकरवार पक्ष के खिलाफ दो जून को एक मुकदमा सिकंदरा थाने में दर्ज कराया। इस मुकदमे की विवेचना दरोगा सुरजीत सिंह को मिली थी। तीन जून को वह इसी मुकदमे के संबंध में नक्शा नजरी बनाने गए थे। विवाद हुआ था। चार जून को पुलिस ने एक दूसरे मुकदमे के वारंट में दबिश देकर सीमा सिकवार को पकड़ा।











