आगरा। डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय के द्वारा परीक्षाओं के लिए जो केंद्र बनाए गए हैं, उनमें कई केंद्र ऐसे हैं जिनमें अनुमोदित प्राचार्य और शिक्षक नहीं हैं। प्रबंधकों द्वारा परीक्षा कराई जा रही हैं। ऐसे में इन कॉलेजों को केंद्र कैसे बना दिया गया? यह सवाल खड़े हो रहे हैं।
हरिचरण लाल कॉलेज का फर्जी शिक्षक( इंटर किया हुआ), प्रबंधक के कहने पर पेपर लीक कर रहा था। प्रबंधक के द्वारा कॉलेज में परीक्षाएं कराई जा रही थीं। कॉलेज में कोई अनुमोदित प्राचार्य और शिक्षक नहीं था। फिर भी उसे केंद्र बना दिया गया। मंगलवार की परीक्षा के दौरान तो एक किसान को प्राचार्य बना दिया गया। इंस्पेक्टर लोहामंडी देवेंद्र शंकर पांडे ने इस बात का खुलासा किया था। सवाल यह भी खड़े हो रहे हैं कि जब कॉलेज में कोई प्राचार्य ही नहीं था तो वहां 14 मई से पहले तक पेपर किसे रिसीव कराए गए। नियम के मुताबिक पेपर प्राचार्य को ही रिसीव कराए जाने चाहिए। इधर शासन का आदेश है कि परीक्षाओं के दौरान प्रबंधक कॉलेज परिसर से दूर रहें, लेकिन विश्वविद्यालय के अधिकांश कॉलेजों में प्रबंधकों द्वारा परीक्षाएं कराई जा रही हैं। विशेष सूत्रों की मानें तो विश्वविद्यालय की ओर से परीक्षाओं के लिए जो केंद्र बनाए गए हैं उनमें अधिकतर कॉलेजों में विश्वविद्यालय की ओर से अनुमोदित प्राचार्य व शिक्षक नहीं हैं। इन कॉलेजों में पुलिस द्वारा जेल भेजे गए अनेक सिंह की तरह लोगों को परीक्षा कराने के लिए हायर किया गया है।
इधर मामला सुर्खियों में आने के बाद और लखनऊ तक पहुंचने के बाद विश्वविद्यालय ने हरिचरण लाल कॉलेज की अस्थाई मान्यता को समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन जिन लोगों के द्वारा केंद्र बनाया गया है उन पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है।
सीसीटीवी कैमरे भी नहीं केंद्रों पर
आगरा। विश्वविद्यालय की ओर से जो परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं उनमें अधिकतर पर सीसीटीवी कैमरे भी नहीं लगे हैं, जबकि शासन का आदेश है जिन कॉलेजों में सीसीटीवी कैमरे नहीं है उन्हें केंद्र नहीं बनाया जाए। इस बार विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में शासन के आदेशों की जमकर धज्जियां उड़ रही हैं।











