नई दिल्ली। ज्ञानवापी मामले में आज हिंदू और मुस्लिम पक्ष ने अपनी तरफ से जोरदार दलीलें रखीं। सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि यह काफी जटिल केस है। इस वजह से इसे ऐसे जज के पास भेजना चाहते हैं जिनके पास लंबा अनुभव है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शांति, सौहार्द्र बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है। समुदायों के बीच भाईचारा बना रहना चाहिए। इससे सब ओर शांति होगी। शांति और भाईचारे की बात करते हुए सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने तीन अहम सुझाव रखे। जस्टिस चंद्रचूड़ ने आश्वस्त करते हुए कहा कि सभी पक्षों के हित सुरक्षित रखे जाएंगे।
इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने तीन सुझाव दिए। कोर्ट ने कहा कि हम निर्देश दे सकते हैं कि आर्डर 7 रूल 11 के तहत ट्रायल कोर्ट दायर की गई याचिका का निपटारा करे। हमने जो अंतरिम आदेश जारी किया है वह आर्डर 7 रूल 11 के तहत दायर याचिका के निपटारा होने तक जारी रहे। इस मामले की जटिलता और संवेदनशीलता को देखते हुए हमारा विचार है कि मामले की सुनवाई जिला जज को करनी चाहिए क्योंकि उनके पास 25 साल का अनुभव है। जिला जज के विवेक पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम आदेश नहीं देंगे कि जिला जज किस तरह से काम करें।
एक हिंदू याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वकील एस. वैद्यनाथन ने कहा कि सभी आदेश लागू किए जा चुके हैं। जहां तक आर्डर 7 रूल 11 के तहत आवेदन के फैसले की बात है, प्रॉपर्टी का धार्मिक स्वरूप देखना होगा। उसके लिए कमिशन की रिपोर्ट देखनी होगी। ट्रायल कोर्ट को रिपोर्ट देखने दीजिए।
उधर, मस्जिद कमिटी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अहमदी ने कहा कि इस मामले में बड़ी शरारत हो सकती है। इसे शुरू में ही निपटना होगा। कमिशन की नियुक्ति से लेकर अब तक के सारे आदेश गैरकानूनी हैं और उन्हें खारिज किया जाना चाहिए। मुस्लिम पक्ष ने कहा कि उनकी आपत्ति आयोग की नियुक्ति पर है। अहमदी ने कहा कि यथास्थिति को पहले ही बदला जा चुका है। वे ऐसी जगह को सील करवाने में कामयाब हो रहे हैं जिसे एक पक्ष 500 साल तक इस्तेमाल करता आया है। अहमदी ने आशंका जताई कि इस मामले का असर दूरगामी होगा। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि जब तक आवेदन पर फैसला होगा, जमीन पर क्या होगा? आपको देखना होगा कि इस मामले का इस्तेमाल देश में 4-5 मस्जिदों के लिए हो रहा है, इससे सार्वजनिक शांति भंग हो सकती है।











