आगरा। किरावली थाने में थानाध्यक्ष नीरज कुमार व अन्य पुलिस कर्मियों के द्वारा युवक को उल्टा लटकाकर उसकी दोनों टांगें तोड़ने और उसके बेहोश होने तक थर्ड डिग्री दिए जाने के मामले में मानवाधिकार आयोग ने पुलिस कमिश्नर से जवाब मांगा है। मानवाधिकार आयोग के जवाब मांगने के बाद विभाग में खलबली मच गई है। इधर अपर पुलिस आयुक्त रामबदन सिंह अभी तक जांच पूरी ही नहीं कर पाए हैं। इस बात को लेकर उनके ऊपर सवाल खड़े हो रहे हैं।
किरावली के गांव करहरा निवासी वनवीर सिंह फौजी की पांच अगस्त को हत्या कर दी गई थी। उसका शव घर में ही मिला था। हत्या के इस मामले में किरावली पुलिस ने बिना साक्ष्य के आधार पर पड़ोसी युवक राजू पंडित को पूछताछ के बहाने थाने बुलाया था। इसके बाद युवक पर पुलिस का गुस्सा कहर बनकर टूटा। शाल से पैर बांधने के बाद युवक को बेहोश होने तक उल्टा लटकाकर थर्ड डिग्री दी गई। युवक को डंडों से इस कदर पीटा गया था कि उसके दोनों पैर टूट गए। इस मामले में एसओ नीरज कुमार, दारोगा धर्मवीर सिंह और बीट सिपाही रवि मलिक को निलंबित किया गया। मानवाधिकार कार्यकर्ता नरेश पारस ने मामले की शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत की थी। आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ राज्य मानवाधिकार आयोग में केस दर्ज कर लिया था। मामले में पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार से 18 फरवरी तक जवाब मांगा गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ अब तक आगरा पुलिस के द्वारा मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। जांच अधिकारी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। न तो उन्हें पीड़ित की टूटी टांगें दिखाई दे रही हैं और न ही उसका असहनीय दर्द। अपर पुलिस आयुक्त रामबदन सिंह कब तक जांच पूरी कर पाएंगे? आखिर उन्हें जांच करने में देरी क्यों हो रही है? यह जानने के लिए उनका फोन लगाया गया लेकिन उनका फोन नहीं उठा।











