आगरा। एत्माउद्दौला थाने में बुधवार शाम को उस समय खलबली मच गई जब मुंबई के कपड़ा कारोबारी ने अपना अपहरण होने के बाद पैसे देकर छूटने की बात बताई। पुलिस ने जांच की तो सामने आया कि अपहरण की कहानी फर्जी थी। मामला समलैंगिक संबंध और पैसों के विवाद का निकला। पांच घंटे के अंदर इंस्पेक्टर ने पूरी घटना का पर्दाफाश कर दिया।
बुधवार दोपहर को थाने पहुंच कर मुंबई के कपड़ा कारोबारी सतीश अग्रवाल ने पुलिस को बताया कि उन्हें कार सवार बदमाशों ने अगवा कर हाथरस की ओर ले जाकर मारपीट की और ऑनलाइन फिरौती लेने के बाद छोड़ दिया। हालांकि पुलिस जांच में यह पूरी कहानी झूठी और मनगढ़ंत निकली। महज 5 घंटे में पुलिस ने मामले का पर्दाफाश कर दिया। इस मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
मंगलवार को आए थे कपड़ा कारोबारी
मुंबई निवासी सतीश अग्रवाल, जिनकी सुचिता फेब्रीकेट्स नाम से फर्म है मंगलवार को आगरा आए थे और दरेसी स्थित एक होटल में ठहरे थे। बुधवार दोपहर करीब 2 बजे उन्हें दिल्ली के एक परिचित कारोबारी विकास अग्रवाल का फोन आया, जिसने रामबाग पर मिलने के लिए बुलाया। सतीश ऑटो से रामबाग पहुंचे और एक दुकान के पास खड़े होकर इंतजार करने लगे। इसी दौरान नीले रंग की एक कार आई, जिसमें सवार दो लोगों ने उन्हें जबरन बैठा लिया, ऐसा दावा उन्होंने पुलिस से किया था। कारोबारी के अनुसार, कुछ देर बाद उन्हें होश आया तो वह किसी खेत में थे, जहां 7–8 लोग मौजूद थे। आरोपियों ने मारपीट की, पैसे मांगे और परिजनों से फिरौती दिलाने का दबाव बनाया। सतीश ने बताया कि एजेंट के जरिए आरोपियों के बताए खाते में 1 लाख रुपये और बाद में 20 हजार रुपये और ट्रांसफर कराए गए, तब जाकर उन्हें सादाबाद (हाथरस) के पास छोड़ दिया गया। वह राहगीरों की मदद से बस स्टैंड पहुंचे और 50 रुपये मांगकर दरेसी लौटे, जहां व्यापारियों को घटना बताई। इसके बाद व्यापारी नेता टीएन अग्रवाल के साथ वह थाना एत्माद्दौला पहुंचे। इंस्पेक्टर देवेंद्र दुबे ने मामले को गंभीरता से लिया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल डिटेल और लोकेशन ट्रेसिंग के जरिए जब जांच की, तो कारोबारी की कहानी में कई विरोधाभास सामने आए। जांच में खुलासा हुआ कि यह कोई अपहरण या लूट नहीं, बल्कि समलैंगिक रिलेशनशिप और पैसों के लेन-देन से जुड़ा पुराना विवाद था। उसी विवाद को छिपाने के लिए सतीश अग्रवाल ने अपहरण और लूट की झूठी कहानी रची थी।











