आगरा। मुख्यमंत्री के आदेश पर विश्वविद्यालय की फर्जीवाड़े की जांच कर रही एसटीएफ को कई फर्जी वेरिफिकेशन मिले हैं। विश्वविद्यालय के बाबू ने पूर्व में उन्हें सत्यापित कर भेज दिया, जबकि छात्रों ने प्रवेश ही नहीं लिया था तो परीक्षा देना तो दूर की बात रही।
बता दें कि एसटीएफ के द्वारा एक-एक बिंदु पर जांच की जा रही है। अभी वह उन बाबू और अधिकारियों के बारे में साक्ष्य जुटा रही है जो फर्जीवाड़े में संलिप्त हैं। एसटीएफ के द्वारा 2002 से लेकर अब तक रहे कुलपति, कुलसचिव और वित्त अधिकारी के नाम भी पूछे गए हैं। मतलब साफ है अधिकारी भी रडार पर हैं।
उल्लेखनीय है अब तक दो कुलपति प्रोफेसर मोहम्मद मुजम्मिल और प्रोफेसर डीएन जौहर के खिलाफ भ्रष्टाचार की धाराओं में f.i.r. हो चुकी है। दो अन्य कुलपति डॉ. अरविंद दीक्षित और प्रोफसर अशोक मित्तल की विजिलेंस जांच चल रही है। डॉ. अरविंद दीक्षित को गोपनीय जांच में दोषी पाया गया है। चार कुलपति भ्रष्टाचार में फंस चुके हैं।
एसटीएफ के द्वारा कर्मचारियों की सूची मांगने के अलावा कई रिकॉर्ड भी मांगे गए हैं। एसटीएफ ने मथुरा के डायट में लगे शिक्षकों के वेरिफिकेशन सत्यापित कराए हैं। सूत्रों की मानें तो इनमें से 30 से ऊपर वेरिफिकेशन फर्जी पाए गए हैं। पूर्व में विश्वविद्यालय से गए वेरिफिकेशन में इन छात्रों को वास्तविक छात्र माना गया था, जबकि यह विश्वविद्यालय के छात्र ही नहीं रहे। यह सभी छात्र मार्कशीट में खंदारी परिसर के दाऊ दयाल संस्थान के दर्शाए गए हैं। ऐसे में उन बाबू की मुश्किलें बढ़ गई हैं जिन्होंने यह वेरीफिकेशन सत्यापित कर भेजे थे। सूत्रों का यह भी कहना है कि एसटीएफ ने कई बड़ी मछलियों को पकड़ने के लिए साक्ष्य जुटा लिए हैं। अभी कई के खिलाफ साक्ष्य और जुटाने हैं। वह एक साथ सब की गिरफ्तारी करेगी। एसटीएफ विश्वविद्यालय की छवि को सुधारने के लिए और यहां पर फर्जीवाड़ा करने वाले दोषियों को जेल भेजने के लिए ही भेजी गई है।










