-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में जहां एक और नकल कराने के लिए 10 हजार रुपए मांगे जाने का आरोप लग रहा है, वहीं दूसरी ओर उड़नदस्तों को कहीं भी नकल नजर नहीं आ रही है। चार दिन में अभी तक एक भी कॉलेज नकल में नहीं पकड़ा गया है, जबकि रोजाना विश्वविद्यालय के 50 हजार से ऊपर रुपए इसी पर खर्च हो रहे हैं।
बता दें कि 15 मई से चार जिले (आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, मैनपुरी) में दो टीमें भेजी जा रही हैं। एक टीम में तीन शिक्षक भेजे जा रहे हैं। अगर खर्चे की बात करें तो शिक्षकों को रोजाना प्रति शिक्षक के हिसाब से 240 रुपए रिम्युनरेशन और 700 से 900 के बीच में डीए दिया जाता है। इसके अलावा वह जिन गाड़ियों में जाते हैं उन पर भी हजारों रुपए का खर्चा होता है। विश्वविद्यालय के वर्तमान में हर रोज करीब 50 हजार और उससे ज्यादा रुपए खर्च हो रहे हैं, लेकिन नकल कहीं भी नहीं पकड़ी जा रही है। नकल के नाम पर अभी तक सिर्फ 6 नकलची पकड़े गए हैं। वह भी मथुरा के ही शिक्षकों ने पकड़े थे। टीमों को कहीं भी नकल नजर नहीं आ रही है। 15 मई से लेकर अभी तक कई बड़े पेपर हुए हैं। बीती परीक्षाओं की बात करें तो विश्वविद्यालय ने नकल के नाम पर चंद कॉलेज ही पकड़े थे और खर्चा करीब 15 से 20 लाख रुपए हुआ था। डीएलए द्वारा बुधवार को लाल सिंह कॉलेज पर हंगामे की खबर प्रकाशित की गयी थी। छात्रों ने आरोप लगाया था कि नकल के लिए उनसे 10 हजार रुपये मांगे जा रहे हैं। पैसे नहीं देने पर उनके साथ मारपीट की गई है। मामला सुर्खियों में छाने के बाद विश्वविद्यालय ने लाल सिंह का केंद्र निरस्त कर दिया है। नकल नहीं पकड़े जाने के सवाल पर उड़नदस्ता प्रभारी प्रोफेसर बिंदु शेखर शर्मा का कहना है कि नकल पकड़ने के लिए रोजाना हर जिले में दो-दो टीमें भेजी जा रही हैं। टीमों के सदस्यों का कहना है कि उन्हें कहीं भी नकल नहीं मिल रही है। उड़नदस्ता प्रभारी का कहना है कि जो भी कॉलेज नकल में पकड़े जाएंगे उन पर कड़ी कार्रवाई होगी।











