आगरा। डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय में संविदा कर्मचारियों को दिवाली से पहले उपहार दिए गए हैं, लेकिन दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नजरअंदाज कर दिया गया है। इस बात को लेकर कर्मचारी काफी दुखी हैं। अधिकारियों को शर्मिंदगी महसूस कराने के लिए दैनिक वेतन भोगी आपस में और स्थाई कर्मचारियों से चंदा एकत्रित कर उपहार ले आए। अधिकारी के सामने जब उन्हें बांटने के लिए अनुरोध करने के लिए पहुंचे तो अधिकारी ने उन को बांटने के लिए उपकार भी नहीं किया।
विश्वविद्यालय में हर साल दिवाली से पहले स्थाई कर्मचारियों को कुछ ना कुछ उपहार दिए जाते हैं। इस बार संविदा कर्मचारियों को भी उपहार दिए गए। दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों ने भी मांग की कि उन्हें उपहार दिए जाएं। आरोप है अधिकारियों ने उन्हें बहुत छोटा समझ लिया। इस बात से कर्मचारी बेहद दुखी हैं। कर्मचारियों का कहना है कि छोटे से छोटा काम वही करते हैं। फिर भी उनके साथ अधिकारियों के द्वारा भेदभाव और पक्षपात किया जा रहा है।
कर्मचारियों को दुखी देखकर कई स्थाई कर्मचारियों ने उन्हें चंदा एकत्रित कर पैसे दिए। इसके अलावा दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों ने भी आपस में जो सहयोग बन सकता था, उस हिसाब से पैसे एकत्रित किए। करीब 30 हजार का चंदा एकत्रित हो जाने के बाद उपहार मंगाए। इसके बाद वह बड़े अधिकारी के पास में गए कि वह अपने पैसे से उपहार ले आए हैं। बस वह उन्हें अपने हाथ से उन्हें दे दें, लेकिन अधिकारी ने मना कर दिया। कर्मचारी नेता डॉ. आनंद टाइटलर का कहना है कि दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के साथ विश्वविद्यालय के अधिकारियों को पक्षपात नहीं करना चाहिए था। संविदा कर्मचारियों को उपहार बांटे हैं और इन्हें नजरअंदाज कर दिया है, यह गलत है।











