आगरा। पुलिस दबिश के दौरान अधिवक्ता की हुई मौत के मामले में परिजनों के द्वारा हंगामा किया गया। उनकी मांग थी कि अधिवक्ता की मौत के जिम्मेदार दोषी पुलिसकर्मियों व मुकदमा लिखाने वाले मनोज शर्मा की गिरफ्तारी कर जेल भेजा जाए। इसके बाद ही वह अधिवक्ता के शव का अंतिम संस्कार कराएंगे। वह यह भी बोल रहे थे कि दोषी पुलिसकर्मी अचानक कहां गायब हो गए हैं। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि वह दोषी पुलिसकर्मियों को जेल भेजेंगे। इसके बाद परिजन अंतिम संस्कार कराने के लिए राजी हुए।
अधिवक्ता सुनील शर्मा अपनी पत्नी के साथ मंगलम आधार अपार्टमेंट में फ्लैट नंबर 801 में रह रहे थे। शुक्रवार देर रात पुलिस की एक गाड़ी अपार्टमेंट में आई। चर्चाएं हैं कि गाड़ी में थानाध्यक्ष राजीव कुमार, दरोगा अनुराग सिंह, मांगेराम, अजीत कुमार, सचिन तोमर, एक महिला कांस्टेबल आदि थे। पुलिस कर्मी ऊपर गए। पुलिस को अधिवक्ता सुनील शर्मा की तलाश थी। कुछ देर बाद अचानक तेज आवाज हुई। लोगों ने निकल कर देखा तो अधिवक्ता जमीन पर पड़े थे। आनन-फानन में पुलिस कर्मी गाड़ी में बैठकर भागने लगे। लोगों ने उन्हें रोक लिया। पुलिसकर्मी उसी गाड़ी से लहूलुहान हालत में पड़े अधिवक्ता सुनील शर्मा को हॉस्पिटल लेकर गए। जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतक के तीनों भाई का इंतजार हो रहा था। शनिवार शाम को यह सिकंदरा फ्लैट पर पहुंचे। मृतक अधिवक्ता सुनील शर्मा की पत्नी सुनीता की ओर से एक तहरीर दी गई है जिसमें उन्होंने कहा है कि एक मार्च को रात करीब 10:45 बजे पुलिस वालों ने मेरा दरवाजा खुलवाया और मुझसे कहा कि अपने पति को थाना न्यू आगरा भेज देना। तुम्हारे पति के खिलाफ मुकदमा दर्ज है। करीब 10 मिनट बाद ही पुलिस वालों ने जबरन मेरे घर का मुख्य द्वार तोड़ दिया तथा मेरे पति को घर के अंदर से जान से मारने की नीयत से गालियां देते हुए बराबर वाले फ्लैट में तेजी से ले गए। इसके साथ ही मुझे फ्लैट में बंधक बना दिया। 5-7 मिनट बाद ही मेरे पति के चीखने की आवाज आई तो मैं शोर मचाते हुए बाहर निकली तो 8-10 पुलिस वाले जिसमें राजीव सिंह, अनुराग सिंह अन्य पुलिस वाले थे, जो की बगल वाले फ्लैट के कमरे में थे, मिलकर मेरे पति को फ्लैट नंबर 802 की बालकनी से नीचे फेंक रहे थे। मेरे शोर करने के बावजूद भी मेरे पति को आठवीं मंजिल से फेंक दिया। जिसके कारण मेरे पति की मृत्यु हो गई। तहरीर पर थानाध्यक्ष राजीव कुमार, चौकी प्रभारी अनुराग सिंह सहित 8-10 पुलिसकर्मियों के खिलाफ सिकंदरा थाने में हत्या सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हो गया है। थानाध्यक्ष व चौकी प्रभारी को निलंबित भी कर दिया गया है। मुकदमा दर्ज होने के बाद परिजन देर रात पोस्टमार्टम गृह पहुंचे। पोस्टमार्टम होने के बाद रविवार सुबह अधिवक्ता का शव उनके आवास पर पहुंचा। यहां पर उनकी पत्नी के द्वारा कहा गया कि उनके पति के शव का तभी अंतिम संस्कार होगा, जब दोषी पुलिसकर्मियों और मनोज शर्मा की गिरफ्तारी कर उन्हें जेल भेज दिया जाएगा। पत्नी और परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल था। मृत अधिवक्ता की मुंह बोली बहन भी हाईकोर्ट में अधिवक्ता हैं। उनका कहना है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ही गायब हो गई। यह कैसे हो गया? मौके पर मौजूद अधिकारियों ने उन्हें काफी समझाने का प्रयास किया जिसके बाद वह अंतिम संस्कार के लिए माने।
भारी संख्या में पुलिस फोर्स रहा तैनात
मंगलम आधार अपार्टमेंट में रविवार सुबह से ही भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात रहा। कई एसीपी की ड्यूटी लगाई गई। इसके साथ ही सिकंदरा थाने पर भी फोर्स को रिजर्व किया गया था।











