आगरा। कमला नगर थाना पुलिस पुलिस का एक मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। क्षेत्र की जनता सवाल उठा रही है कि जिस सट्टेबाज का नाम इलाके में हर कोई तक जानता है पुलिस को एफआईआर दर्ज करते समय कैसे नहीं पता था। जबकि दो लोग गिरफ्तार भी किए थे उनसे फरार दो लोगों का पूरा नाम भी नहीं पूछा। एफआईआर में जानबूझकर अधूरे नाम लिखे गए जिससे असली वाले सट्टेबाज को फायदा मिल जाए?
पांच दिसंबर को पुलिस ने लोहिया नगर में एक घर में दबिश दी थी। शिवम और भारत कुमार को मौके से गिरफ्तार दिखाया। चौकी प्रभारी बल्केश्वर अमित कुमार ने अपनी तरफ से मुकदमा लिखाया। मुकदमे में प्रवीन उर्फ हप्पू और अनूप कमला नगर को वांछित दिखाया। इलाके में दिल्ली का सट्टा अनूप अग्रवाल कराता है। वही मास्टर माइंड बताया जाता है। पुलिस को अच्छे से पता भी था। लेकिन इसे लाभ दे दिया गया। मुकदमे के दर्ज होने के बाद ही अधिकारियों को शिकायत मिली थी कि पुलिस फरार दोनों आरोपियों को नहीं पकड़ेगी। पुलिस की उनसे सेटिंग हो गई है। क्षेत्र में सभी को पता है कि प्रवीन उर्फ हप्पू के साथ अनूप अग्रवाल दिल्ली के सट्टे का काम करता है। पुलिस भी जानती थी। इसके बावजूद मुकदमे में अधूरा नाम यानी कि सिर्फ अनूप लिखा गया अनूप अग्रवाल नहीं। बलदियत और निवास स्थान भी नहीं खोला गया। चर्चा है कि इसके पीछे खेल यह था कि मास्टरमाइंड अनूप अग्रवाल की जगह मास्टरमाइंड गुरु का चेला अनूप अपनी जमानत कराएगा। पुलिस ने मौके से दो लोग पकड़े थे तो उनसे भी फरार दोनों लोगों के पूरे नाम, पिता का नाम और निवास स्थान पूछ सकती थी लेकिन असली मास्टरमाइंड को फायदा देने के लिए ऐसा नहीं किया। नतीजा तीन जनवरी को सामने आया। अनूप कश्यप ने अग्रिम जमानत के लिए न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। कोर्ट में यह कहा गया कि उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। पुलिस ने अभियुक्तों के बयान के आधार पर सह अभियुक्त बनाया है। कोर्ट ने सुनवाई के बाद सशर्त अग्रिम जमानत स्वीकार कर ली। फिलहाल इलाके से दोनों अनूप गायब हो गए हैं। सूत्रों की मानें तो इस खेल में पूर्व में एसओजी में तैनात एक सिपाही ने अहम भूमिका निभाई है। वर्तमान में उसकी पूर्वी जोन के एक थाने में तैनाती है। उसी के कहने पर मुकदमे में अधूरे नाम लिखे गए थे। ताकि गुरु को लाभ मिल सके। लोग सवाल खड़े कर रहे हैं कि दो आरोपित पकड़े गए तो फरार दोनों आरोपियों के पूरे नाम मुकदमे में क्यों नहीं लिखे गए? पांच दिसंबर से तीन जनवरी तक पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने का प्रयास क्यों नहीं किया? जिस मास्टर माइंड को इलाके में हर कोई जानता है पुलिस उसका नाम कैसे नहीं जानती थी? पुलिस को कैसे पता चला कि जो भागा वह अनूप कश्यप था? पहले दिन पूरा नाम क्यों नहीं खोला? संगठित अपराध पर पुलिस गैंगस्टर की कार्रवाई करती है? फाइल क्यों नहीं शुरू की गई? बिना गैंगस्टर भी पुलिस 107 के तहत संपत्ति जब्तीकरण की फाइल चलाती है। फाइल शुरू क्यों नहीं हुई? क्षेत्र के साथ ही पुलिस विभाग में भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।











