आगरा। प्रेम की नगरी आगरा मैं मोहब्बत के नग्मों के बेताज बादशाह जावेद अली के सुरों से ताजमहोत्सव का औपचारिक आगाज हुआ।
17 से 27 मार्च तक होने वाले 32 वें ताजमहोत्सव की थीम इस बार “संस्कृति और समृद्धि” रखी गई है। महोत्सव की थीम के अनुसार ही शिल्पग्राम में मुक्ताकाशीय मंच तैयार किया गया है।

ताज महोत्सव का औपचारिक उदघाटन रविवार को प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह और महिला व बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य ने किया। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने इस अवसर पर कहा कि प्रदेश के सभी जनपदों की संस्कृति को संजोने एवं संवारने के उद्देश्य से हर जिले में इसी तरह महोत्सव आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिले की लोकसभा एवं विधानसभा के जन प्रतिनिधियों का दायित्व है कि वह सरकार की योजनाओं के साथ-साथ उस जिले की संस्कृति, धरोहर को आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाएं। जयवीर सिंह ने कहा कि ताज महोत्सव बहुत पुराना महोत्सव है, इसे और भव्य रूप देने का हम काम करेंगे। उन्होंने बताया कि आगरा को जोड़ते हुए बटेश्वर, फतेहपुर सीकरी, गोकुल, बरसाना, मथुरा वृंदावन को एक यमुना सर्किट के रूप में जोड़ा जाएगा।
इधर सिंगर जावेद ठीक 9 बजे शिल्पग्राम के मुक्ताकाशीय मंच पर पहुंच गए । अपनी प्रस्तुति शुरू करने से पहले उन्होंने महोत्सव के मंच से आगरा वासियों से कहा कि आगरा ताजमहल और प्रेम की नगरी है। मोहब्बत की नगरी है इसीलिए मोहब्बत करने वालों के नाम एक गीत गाता हूं उसके बाद धुएं को चीरते हुए जावेद की सुरीली आवाज सूफियाना अंदाज में सामने आई तो वो गीत था फ़िल्म गुजारिश का “तू मेरी अधूरी प्यास प्यास तू आ गयी मन को रास रास .. है गुजारिश”…… । इसके बाद गाना फिल्म जोधा अकबर का “कहने को जश्ने बहारा है इश्क़ ये देख के हैराँ है”.. जैसे सूफी गाने ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।











