आगरा। डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय की पूर्व में हुई पीएचडी प्रवेश परीक्षा को लेकर एक छात्रा ने सवालिया निशान खड़े किए हैं। छात्रा का कहना है कि वह हिंदी माध्यम की थी और उसे अंग्रेजी माध्यम में पेपर दे दिया गया। इस वजह से वह प्रश्नपत्र हल नहीं कर पाई।
छात्रा हेमलता गौतम ने स्थाई लोक अदालत में एक याचिका दाखिल की है, जिसमें छात्रा ने कहा है कि नौ अप्रैल 2022 को पीएचडी की प्रवेश परीक्षा हुई थी। प्रवेश परीक्षा से पूर्व जो उसने फॉर्म भरा था उसमें परीक्षा निर्देश पुस्तिका में लिखा हुआ था कि सभी प्रश्न पत्र दो भाषाओं हिंदी और अंग्रेजी में आएंगे लेकिन प्रवेश परीक्षा का द्वितीय प्रश्न पत्र छात्रा को अंग्रेजी में दे दिया गया। छात्रा ने जब कहा कि वह हिंदी माध्यम की है उसे हिंदी माध्यम में पेपर दिया जाए तो परीक्षकों ने कहा कि हिंदी माध्यम में विश्वविद्यालय पेपर प्रिंट कराना भूल गया है। छात्रा ने पेपर परीक्षक पास जमा करा दिया और वह वहां से चली गई। छात्रा ने कोर्ट के माध्यम से मांग की है कि उसका पेपर हिंदी माध्यम में दोबारा कराया जाए। इसके साथ ही जो उसका आर्थिक और मानसिक नुकसान हुआ है उसके लिए उसे 15 हजार रुपए दिलाए जाएं। मामले में स्थाई लोक अदालत ने कोऑर्डिनेटर प्रोफेसर विनीता सिंह को 17 जुलाई को तलब किया है।











