-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। नाई की मंडी थाना क्षेत्र में करोड़ों रुपए की जमीन पर कब्जे का मामला सुर्खियों में छाया हुआ है। इसमें खाकी, खादी और दबंगों तीनों का गठजोड़ सामने आ रहा है। हैरानी की बात यह है कि कब्जा करने वाले फरार नहीं है। नाई की मंडी पुलिस के साथ घूमते देखे गए हैं। जांच के नाम पर अभी तक पीड़ित एक्सपोर्टर को कई बार थाने बुलाया जा चुका है। पीड़ित पक्ष पुलिस की कार्य शैली को देख पहले ही समझ गया था, पुलिस आरोपियों के साथ है। इसलिए अब उसे आगरा पुलिस से ज्यादा न्याय की उम्मीद नहीं है। पीड़ित पक्ष के द्वारा मुख्यमंत्री से मुलाकात का समय लेने के प्रयास किए जा रहे हैं।
पॉश कालोनी भरतपुर हाउस निवासी शू एक्सपोर्टर सारु मुंजाल ने वर्ष 2006 में धाकरान चौराहे के पास तीन लोगों से करीब 180 वर्ग गज जमीन खरीदी थी। वर्ष 2008 में एक पक्ष ने सिविल वाद दायर किया। जो कोर्ट में विचाराधीन है। जमीन पर तभी से सारु मुंजाल का कब्जा था। गुरुवार की रात भूखंड पर लगे दो गेटों के ताले तोड़कर नए ताले लगाए गए। दीवार पर मान सिंह धाकड़ और रमेश धाकड़ ने अपना नाम लिखवा दिया। शुक्रवार की सुबह पीड़ित पक्ष को इसकी जानकारी हुई। सुबह से शाम तक थाने के कई चक्कर काटे। तहरीर लेकर जांच करना तो दूर की बात पुलिस ने पीड़ित पक्ष की बात तक नहीं सुनी। पीड़ित पक्ष को टरका और दिया। देर रात यह मामला पुलिस आयुक्त जे रविन्दर गौड की जानकारी में पहुंचने के बाद एसीपी आस्था जयसवाल को जांच करने के लिए भेजा गया। प्रारंभिक जांच में कब्जे की पुष्टि हुई। इसके बाद मुकदमा लिखा गया। पीड़ित पक्ष ने बताया कि आरोपित ने सिर्फ अपने ताले नहीं डाले मौके पर गार्ड भी तैनात कर दिए थे। शनिवार की रात भी दबंग मौके पर पहुंचे। थाना पुलिस भी उनके साथ थी जिनके खिलाफ मुकदमा दर्ज है। हालांकि दरोगा के द्वारा सफाई दी जा रही है 112 की सूचना थी। 112 पर किसने फोन किया इस बात का जवाब दरोगा के पास भी नहीं है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि दबंग पुलिस के साथ घूम रहे थे। पुलिस की मिलीभगत नहीं होती तो पुलिस आरोपित को थाने में बैठा लेती। कानूनी कार्रवाई करती। इस मामले में पुलिस कार्रवाई से बच रही है। बार-बार जांच के नाम पर पीड़ित पक्ष को थाने बुलाया जा रहा है। पीड़ित पक्ष चीख चीख कर मांग कर रहा है कि मौके पर उनका ताला था, दीवार पर उनका नाम था। पहले जैसी स्थिति बहाल हो। घटना में शामिल पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। लेकिन पुलिस के द्वारा कोई सुनवाई नहीं की जा रही। वह आरोपियों से मिली हुई है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि सोमवार को पहले यह मामला नेंशनल चैंबर और एफमेक संस्था के समक्ष रखा जाएगा। जल्द ही इस मामले में एक प्रतिनिधिमंडल लखनऊ में मुख्यमंत्री से मिलने जाएगा। मुख्यमंत्री को बताया जाएगा आगरा में पुलिस के इशारे पर कैसे जमीनों पर कब्जे हो रहे हैं।
रविवार को थाने बुलाकर पुलिस ने कहा ताला लगा रहने दो, सुनकर पीड़ित पक्ष हुआ हैरान
मामला सुर्खियों में आने के बाद रविवार सुबह नाई की मंडी पुलिस ने पीड़ित पक्ष को थाने बुलाया। पुलिस ने पीड़ित पक्ष से कहा कि ताला लगा देने से और दीवार पर पुताई करने से क्या होता है। पुलिस इस मामले में कुछ नहीं कर सकती है। पीड़ित पुलिस के इन शब्दों को सुनकर हैरान हो गया। उन्होंने सवाल भी खड़े किए कि किसी की संपत्ति पर आखिर कोई ताला कैसे डाल देगा। अपना नाम लिख देगा। पुलिस की नजर में यह अपराध नहीं तो मुकदमा क्यों लिखा।
डीसीपी ने मीटिंग में पूछा कब्जा कैसे हो गया, इंस्पेक्टर के पास नहीं था कोई जवाब
डीसीपी सिटी के पद पर सोनम कुमार ने रविवार को चार्ज ले लिया। चार्ज लेने के बाद उन्होंने सभी एसीपी और इंस्पेक्टर व थानाध्यक्ष की बैठक बुलाई। बैठक में उन्होंने इंस्पेक्टर से पूछा जमीन पर कब्जे का क्या मामला था। इंस्पेक्टर अमित मान बोले मेरे संज्ञान में तो छुट्टी जाने से एक दिन पहले ही आया था। डीसीपी ने पूछा एक दिन पहले आपके सामने पीड़ित आया था तो आपने क्या कार्रवाई की? इस बात का इंस्पेक्टर के पास कोई जवाब नहीं था। डीसीपी ने कहा आप छुट्टी पर चले गए। इसका मतलब यह नहीं कि आपकी संलिप्तता नहीं थी। अगर इस मामले में आपकी संलिप्तता सामने आई तो कड़ी कार्रवाई होगी। डीसीपी ने यह भी कहा कि जगदीशपुरा कांड में तत्कालीन पुलिस कमिश्नर हट गए थे तब भी आपकी समझ में नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा कि जमीनों पर कब्जे की शिकायत नहीं आनी चाहिए। अगर कुछ हुआ तो एसीपी और इंस्पेक्टर जिम्मेदार होंगे।
आगरा में बड़े-बड़े मामलों में नहीं हुई कोई कार्रवाई, क्या इसलिए लगातार कांड हो रहे?
आगरा कमिश्नरेट पिछले कुछ महीने में कई शर्मनाक मामले सामने आए हैं। हैरानी की बात है कि एसीपी ने भी इंस्पेक्टर्स के खिलाफ रिपोर्ट दी। फिर भी उच्च अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। ताजा मामला पर्यटन थाने का है वहां पर थानाध्यक्ष प्रीति चौधरी की पुलिस लाइन के सिपाहियों के साथ विदेशी पर्यटकों को ताजमहल में एंट्री कराने की वीडियो सामने आई थी। अभी तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। एक इंस्पेक्टर ने थाने से टप्पेबाज गैंग छोड़ दिया था उन पर भी कार्रवाई नहीं हुई। एक इंस्पेक्टर की एलआईयू ने अवैध धंधों में संलिप्त होने की रिपोर्ट दी। फिर भी वह नहीं हटे। एक दरोगा ज्वेलर्स को पैसा लेकर बीच रास्ते से छोड़ आया उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। सिकंदरा में इंस्पेक्टर पर कब्जा कराने से लेकर लूट का मुकदमा नहीं लिखने तक कई बार आरोप लगे लेकिन फिर भी वह कायम हैं। कई चोरों को भी उन्होंने छोड़ दिया। फिर भी वह बच गए।











