आगरा। आगरा कमिश्नरेट में चोरी का मुकदमा लिखवाना एक महिला को भारी पड़ गया। जब वह अगस्त 2025 में मुकदमे की जानकारी करने के लिए थाने में गई थी कि मुकदमे को लेकर क्या चल रहा है तो आरोप है उसके साथ थानाध्यक्ष रोहित कुमार और अन्य पुलिसकर्मियों के द्वारा मारपीट और छेड़छाड़ की गई। मामला सुर्खियों में आने के बाद अधिकारियों ने जांच कराने की बात कही थी। हैरानी की बात यह है कि पांच महीने से जांच चल ही रही है। चोरी भी आज तक नहीं खुली है। पांच महीने में पुलिस अधिकारी जांच करके इस बात का निर्णय भी नहीं कर पाए हैं कि महिला के साथ छेड़छाड़ और मारपीट हुई थी या नहीं? यहां के लचर सिस्टम को देखकर महिला मुख्यमंत्री आवास पर आत्महत्या करने के लिए पहुंच गई। पूर्व में उसने अपना वीडियो वायरल कर यह भी कहा था कि अगर वह आत्महत्या करती है तो उसके जिम्मेदार थानाध्यक्ष रोहित कुमार और अन्य दोषी पुलिसकर्मी होंगे। जिस थाना अध्यक्ष पर आरोप लगा था वह आज भी थानाध्यक्ष पद पर कायम है।
बता दें कि महिला सरजू यादव और उनके पति त्रिभुवन सिंह यादव कालिंदी विहार डी ब्लॉक में निवास करते हैं। 15 सितंबर 2024 को दोनों घर का ताला लगाकर कहीं गए थे। जब वापस आए तो देखा कि घर में रखे 80 हजार रुपये और आभूषण चोरी हो गए थे। तहरीर पर 16 सितंबर 2024 को थाने में चोरी की धारा में मुकदमा भी दर्ज हो गया। सरजू यादव इसी मुकदमे की जानकारी करने के लिए अगस्त 2025 में थाने में गई थी। उन्होंने वीडियो वायरल करके आरोप लगाया था कि थानाध्यक्ष रोहित गुर्जर और स्टाफ ने उसे कमरे में बंद करके छेड़खानी की। उसके साथ में मारपीट की। महिला के द्वारा अपने आंख के बराबर में चोट भी दिखाई जा रही थी। उसकी आंख के बराबर में जख्म बना हुआ था। महिला का कहना था कि अगर उसे न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या कर लेगी। वीडियो में महिला का रोते-रोते बुरा हाल था। वह फूट-फूट कर रो रही थी। वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। इसके बाद तीन वीडियो और वायरल हुए जो थाने के अंदर और बाहर के थे। एक वीडियो में महिला सरजू यादव बोल रही है कि यह क्या कर रहे हो आप। मैं वीडियो बनाकर ऊपर तक ले जाने वाली हूं। इस बात पर महिला दरोगा महिला से बोल रही है कि वीडियो बनाने का किसी का अधिकार नहीं है। वह यह भी बोल रही है कि वह एसओ साहब थे। इस बात पर सरजू यादव बोल रही है एसओ साहब थे तो। इसके बाद महिला दरोगा सरजू यादव से तेज आवाज में बात करती है। उधर महिला सरजू यादव भी अपना आपा खो देती है और तेज आवाज में बात करना शुरू कर देती है। सरजू यादव महिला दरोगा से बोलती है बाहर चल बाहर देखती हूं। एक वीडियो और वायरल हुआ जिसमें महिला दरोगा और महिला के बीच में हाथापाई हो रही है। महिला सरजू यादव के द्वारा महिला दरोगा के बाल पकड़ लिए गए हैं। महिला दरोगा के द्वारा सरजू यादव को थप्पड़ जड़े जा रहे हैं। इसके अलावा एक वीडियो और वायरल हुआ जो थाने के बाहर का है। इसमें महिला पुलिसकर्मी सरजू यादव को पकड़ रही हैं। इस बात पर वहां खड़ा कोई पुलिसकर्मी यह भी बोल रहा है। तुम तीन मिलकर इसे नहीं पकड़ पा रही हो। यह वीडियो वायरल होने के बाद थाने में हुए वाक्ये को लेकर कयास लगाए गए थे कि सरजू यादव अपने मुकदमे की जानकारी करने गई थी। उसे बताया गया की जनवरी में मुकदमे में एफआर लग गई है। यह सुनकर महिला हैरान हो गई। आखिर चोर पकड़ा ही नहीं गया और पुलिस ने मुकदमा खत्म भी कर दिया। मतलब कि उसका जो सामान चोरी हुआ था। वह कभी मिलेगा ही नहीं। फिर उसके पति का मुकदमा लिखाने का क्या मतलब रहा? महिला ने अपना आपा खोते हुए पुलिस से सवाल जवाब करते हुए वीडियो बनाना शुरू किया। वीडियो बनाने का पुलिसकर्मियों ने विरोध किया। महिला का कहना था कि वह यह वीडियो इसलिए बना रही है जिससे इसे ऊपर तक ले जाए। इस पर उसे महिला दरोगा के द्वारा बताया गया की वीडियो बनाने का उसका अधिकार नहीं है। किसी जेंट्स पुलिसकर्मी ने महिला को हाथ लगा दिया जिससे वह और नाराज हो गई। इसके बाद दोनों पक्षों में कहासुनी के बाद मारपीट हो गई। इधर मामले में अधिकारियों ने जांच कराने की बात कही लेकिन आगरा कमिश्नरेट में कोई भी जांच कछुआ गति की चाल से ही की जाती है। पांच महीने में यह तय नहीं हो पाया है कि महिला के साथ मारपीट और छेड़खानी हुई थी या नहीं। इसके साथ ही उसको बिना बताए मुकदमा में एफआर कैसे लगा दी गई। तत्कालीन इंस्पेक्टर भानु प्रताप यादव ने विवेचना का क्या पर्यवेक्षण किया। थानाध्यक्ष रोहित कुमार और अन्य पुलिसकर्मियों के साथ अगर महिला ने मारपीट की थी तो महिला का शांति भंग में ही चालन क्यों किया उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया। सरजू यादव को थाने के अंदर चोटें कैसे आई उसका जिम्मेदार कौन है। सरजू यादव को न्याय नहीं मिलने पर वह मुख्यमंत्री आवास पर आत्मदाह करने के लिए पहुंच गई। उसका कहना था कि थानाध्यक्ष रोहित कुमार और अन्य पुलिस कर्मियों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। रोहित कुमार वर्तमान में एमएम गेट थाना अध्यक्ष बने हुए हैं। हो सकता है जब तक जांच चलती रहे उनका आगरा में कार्यकाल भी पूरा हो जाए और गैर जनपद चले जाएं। सवाल उठता है कि जब आरोप पुलिस पर हों, तो पीड़ित को न्याय आखिर कहां और कैसे मिलेगा। किरावली और जीवनी मंडी वाले मामले में भी यही हो रहा है।











