आगरा। दवा व्यापार में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और नकली, नशीली तथा एक्सपायरी दवाओं के अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने प्रदेशव्यापी थोक ड्रग लाइसेंस सत्यापन अभियान को तेज कर दिया है। इसी अभियान के तहत गुरुवार को आगरा के सर्किट हाउस में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने की।
बैठक में आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने स्पष्ट किया कि प्रदेश स्तर पर चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य उन फर्जी, निष्क्रिय और लंबे समय से बंद पड़े ड्रग लाइसेंसों की पहचान करना है, जिनकी आड़ में कुछ लोग अवैध रूप से दवाओं की आपूर्ति और कारोबार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी दवा प्रतिष्ठान का लाइसेंसधारी स्वयं व्यवसाय संचालित नहीं कर रहा है और किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से दुकान या प्रतिष्ठान चलाया जा रहा है, तो ऐसे मामलों में ड्रग लाइसेंस निरस्त करने सहित कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि नकली दवाओं, नशीली दवाओं, एक्सपायरी दवाओं के कारोबार और चिकित्सकीय सैंपलों की अवैध बिक्री के खिलाफ विभाग का अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।आयुक्त ने दवा बाजारों के भवन स्वामियों को निर्देश दिए कि वे अपने परिसरों में संचालित दवा प्रतिष्ठानों की नियमित निगरानी करें। यदि कोई दुकान लंबे समय से बंद है, अनियमित रूप से संचालित हो रही है अथवा किसी संदिग्ध गतिविधि में शामिल दिखाई देती है, तो इसकी जानकारी तत्काल प्रशासन और औषधि विभाग को दें। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना नाम-पट्टिका वाली या नियमों का पालन न करने वाली दुकानों के खिलाफ सीलिंग और अन्य प्रशासनिक कार्रवाई भी की जा सकती है। दवा व्यापारियों को निर्देशित किया गया कि वे अपने प्रतिष्ठानों, गोदामों और शाखाओं के शटर पर फर्म का नाम, ड्रग लाइसेंस संख्या, जीएसटी नंबर तथा मोबाइल नंबर स्पष्ट रूप से अंकित कराएं। इसके अलावा जिन व्यापारियों द्वारा लंबे समय से कारोबार नहीं किया जा रहा है, उनसे अपने निष्क्रिय लाइसेंस विभाग को समर्पित करने की अपील भी की गई।










