आगरा/ एटा। प्रदेश सरकार की मंशा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का समग्र विकास करे और रोजगार परक हो। इसी के चलते राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बड़े बदलाव किए गए हैं, ताकि देश का प्रत्येक नौजवान शिक्षित होकर राष्ट्र को आगे बढ़ाने के लिए तत्पर हो सके। यह बात मुख्यमंत्री के शिक्षा सलाहकार एवं पूर्व में यूजीसी के चेयरमैन रहे प्रो. डीपी सिंह ने कहीं। वह आज एटा में आए हुए हैं। जैसे ही वह अपने क्षेत्र में पहुंचे लोगों में उन्हें देखने की उत्सुकता जाग उठी। काफी संख्या में लोग उनसे मिलने के लिए पहुंचे।
प्रो. डीपी सिंह शुरू से ही प्रतिभा के धनी रहे हैं। वह जलेसर के नगला खुशाल सिंह गांव के रहने वाले हैं। वह यूजीसी के चेयरमैन रहे हैं। इसके साथ ही नैक के निदेशक, बनारस और इंदौर विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें अगस्त महीने में शिक्षा सलाहकार बनाया है।
आज जलेसर में प्रोफेसर डीपी सिंह ने बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अधिक से अधिक क्रियान्वयन के लक्ष्य के साथ उन्हें अपना शिक्षा सलाहकार बनाया है। बेसिक, माध्यमिक तकनीकी, उच्च शिक्षा इसमें सम्मिलित हैं। शिक्षा को समग्रता के साथ देखा जाना चाहिए, जिसके लिए बेसिक एजुकेशन अच्छी होनी आवश्यक है। शिक्षा गुणवत्ता पूर्ण हो। रोजगार परक हो। वहीं यह संस्कार युक्त और मानवीय मूल्य आधारित होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री के शिक्षा सलाहकार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इस प्रावधान को उत्तर प्रदेश में क्रियान्वयन करने के लिए जहां हमें और विद्यालय विश्वविद्यालय खोलने होंगे वहीं जो वर्तमान में शिक्षा संस्थान हैं उनमें भी शिक्षा की गुणवत्ता को और बढ़ाना होगा, जिससे विद्यार्थी अधिक से अधिक शिक्षण संस्थानों में पहुंच सकें। शिक्षा नीति के अनुरूप कक्षा 6 से ही व्यावसायिक पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जा सकें। विद्यार्थी पढ़ लिख कर अपना अच्छे से अच्छा जीविका उपार्जन कर सकें। इसी तरह शिक्षा नीति के प्रावधान के अनुरूप बड़ा बदलाव प्रादेशिक स्तर पर यह करना होगा कि पूरी की पूरी शिक्षा व्यवस्था समग्र रूप से संचालित की जा सके। अब किसी भी पाठ्यक्रम में या कक्षा में खेलकूद व्यायाम, योग, एनसीसी, एनएसएस आदि पाठ्यक्रम के अंतर्गत ही शामिल किए जाएं। अकादमिक विषयों के साथ-साथ उनका मूल्यांकन भी होगा। इसका अर्थ यह हुआ विद्यालय या छात्र को सभी गतिविधियां शिक्षा के दौरान पाठ्यक्रम के अंतर्गत ही प्राप्त करनी पड़ेगी।
प्रोफेसर डीपी सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री की अपेक्षा है कि उत्तर प्रदेश में स्थापित सभी विश्वविद्यालय तथा अन्य उच्च शिक्षा संस्थान महाविद्यालय आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी, केंद्रीय प्रयोगशाला एक साथ मिलकर प्रादेशिक समस्याओं के निवारण को उचित शोध एवं अनुसंधान करें।
प्राइमरी विद्यालय एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय का भी किया निरीक्षण
मुख्यमंत्री के शिक्षा सलाहकार प्रो. धीरेंद्र प्रताप सिंह ने प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय सिमराऊ में प्राप्त की थी। वहां वह निरीक्षण पर पहुंचे। वहां मौजूद शिक्षक अभिषेक राजपूत और समरेंद्र पाल सिंह से बात कर विद्यालय में व्याप्त कमियों को दूर करने के निर्देश दिए। वह गांव में ही स्थित शासकीय कृषि फार्म को भी देखने गए। अपने पारिवारिक बड़े भाई वीरेंद्र सिंह से भी मिले।











