आगरा। ट्रांस यमुना थाना क्षेत्र में एक पीड़ित के मकान पर दबंग व्यक्ति ने कब्जा कर रखा है। पीड़ित ने अधिकारियों से शिकायत की तो उल्टा उसे ही थाना पुलिस ने शांति भंग में पाबंद कर दिया। पीड़ित ने न्याय के लिए कोर्ट में गुहार लगाई है। पीड़ित ने कोर्ट में दाखिल किए प्रार्थना पत्र में इंस्पेक्टर ट्रांसयमुना भानु प्रताप यादव को कठघरे में खड़ा किया है। यह भी आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री पोर्टल और पुलिस कमिश्नर से शिकायत करना उन्हें भारी पड़ गया। उनका शांतिभंग में चालान कर दिया। मकान पर कब्जे के विवाद को जांच में लेन-देन का दर्शा दिया। इतना ही नहीं प्रतिवादी को रिपोर्ट में यादव से शर्मा बना दिया। याचिका पर न्यायालय में सुनवाई चल रही है।
अंजनी विहार, टेढ़ी बगिया निवासी राजेश कुमार शर्मा ने मुकदमा दर्ज कराने के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया है। पीड़ित का कहना है कि पहले उसने इस संबंध में पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। थाना प्रभारी ने अधिकारियों को जो पाठ पढ़ाया उन्होंने उसे सच मान लिया। पीकेश यादव को उसने करीब चार साल पहले अपना चंदन नगर का मकान किराए पर दिया था। उस समय लॉक डाउन लगा था। पीकेश हॉस्पिटल संचालक है। उसने कहा था कि समय पर किराया देगा। जब बोलेंगे मकान खाली कर देगा। किराया तो दूर की बात आरोपित अब मकान खाली नहीं कर रहा है। इस संबंध में पीड़ित ने मुख्यमंत्री पोर्टल और पुलिस कमिश्नर से शिकायत की। शिकायत करने पर उसे ही शांति भंग में पाबंद कर दिया गया। इस बात की शिकायत भी उसने अधिकारियों से की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि आरोपित की पुलिस से सेटिंग है। आरोपित ने खुद चीख-चीखकर ऐसा बोला। नतीजा उसने अपनी आंखों से भी देखा। इंस्पेक्टर भानु प्रताप यादव ने अधिकारियों को बता दिया कि पीकेश ने मकान में छह-सात लाख रुपये का काम कराया था। रुपयों का विवाद है। मकान पर कब्जा पुलिस खाली नहीं करा सकती है। पीड़ित को कोर्ट जाना पड़ेगा। पुलिस मकान खाली नहीं करा सकती मगर आरोपित के खिलाफ प्रार्थनापत्र पर जांच कर मुकदमा लिख सकती है। पुलिस ने ऐसा भी नहीं किया। पीड़ित का आरोप है कि उसने मुख्यमंत्री पोर्टल और पुलिस कमिश्नर से शिकायत की थी। इसके बाद उसका शांतिभंग में चालान कर दिया गया। पीड़ित का आरोप है कि थाना प्रभारी और आरोपित के बीच रिश्तेदारी है। हालांकि उसके पास इसके प्रमाण नहीं हैं। पीड़ित ने प्रार्थना पत्र में यह भी कहा है कि थाना प्रभारी भानु प्रताप यादव को वहां से हटाया जाए। पीड़ित ने अपने याचिका में यह भी कहा है कि जिस व्यक्ति ने उसके मकान पर कब्जा किया है वह अपराधी किस्म का है उसके द्वारा वर्ष 2014 में तत्कालीन थाना अध्यक्ष एत्माउद्दौला शैलेंद्र सिंह को हत्या की धमकी दी गयी थी। इसके अलावा एक अस्पताल से चौथ वसूली के संबंध में फायरिंग की थी। उसने कहा है की बड़ी हैरानी की बात है कि थाना ट्रांस यमुना प्रभारी और थाना पुलिस ऐसे अपराधी की मदद कर रही है, जबकि मुख्यमंत्री जी के निर्देश हैं अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, लेकिन ऐसे पुलिसकर्मी अपराधी के साथ मिलकर मुख्यमंत्री के आदेश को पलीता लगा रहे हैं। कोर्ट से गुहार लगाई है कि उसके प्रार्थनापत्र पर मुकदमा कायम कराया जाए।











