आगरा। किरावली थाने में युवक के मुंह में कपड़ा ठूंसकर, शॉल से हाथ बांधकर उसके बेहोश होने तक थर्ड डिग्री दिए जाने के मामले में सिर्फ पुलिसकर्मियों को निलंबित करके लीपापोती कर दी गई है। पीड़ित के दोनों पैर टूटे पड़े हैं और अभी तक दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज ही नहीं हुआ है। मामला मानवाधिकार आयोग तक भी पहुंच गया है। एक समाजसेवी के द्वारा मानवाधिकार आयोग में पूरे प्रकरण की शिकायत कर आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
गांव करहारा निवासी पूर्व फौजी वनवीर सिंह का शव पांच अगस्त की सुबह घर में मिला था। स्वजन ने गला घोंटकर हत्या का आरोप लगाते हुए अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने पूछताछ के लिए गांव के ही राजू पंडित को फोन करके रविवार को किरावली थाने में बुलाया। राजू ने बताया कि वह शाम करीब सात बजे थाने पहुंचे। रात आठ बजे थाने के एक कमरे में पुलिसकर्मी ले गए और शाल से दोनों पैरों को बांधकर एक डंडे की मदद से उल्टा लटका लिया। इसके बाद थानाअध्यक्ष नीरज कुमार की मौजूदगी में थर्ड डिग्री दी गई। दो दरोगा और एक सिपाही पीटते हुए बार-बार पूछ रहे थे कि हत्या किसने की। उसके मना करने पर खुद हत्या करने की बात कबूल करने के लिए दबाव बनाया गया। पुलिसकर्मियों ने पीटते-पीटते पांच डंडे तोड़ दिए। चार डंडे लकड़ी के और एक प्लास्टिक का डंडा टूटा। युवक के दोनों पैरों में फ्रेक्चर होने और बेहोश होने पर पुलिसकर्मियों के हाथ-पैर फूल गए। उसे इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराने के साथ ही मामले को दबाने के लिए जोर लगाया गया। केंद्रीय राज्य मंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल के पुलिस कमिश्नर से कहने के बाद मामले में जांच हुई। इसके बाद थानाध्यक्ष और दो पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। लेकिन अभी तक उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। सोशल मीडिया पर पुलिस की कार्य शैली को लेकर लोगों में भारी आक्रोश है। वह तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं। इधर आगरा पुलिस के द्वारा अभी तक दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किए जाने पर समाजसेवी नरेश पारस ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत की है। उन्होंने शिकायत में कहा है कि किरावली पुलिस ने राजू को थाने में बुलाकर हिरासत में दो दिन तक रखकर थर्ड डिग्री दी है। इससे उसके दोनों पैरों में फ्रैक्चर हो गया है। मुंह में कपड़ा ठूंसकर और हाथ बांधकर उसे थर्ड डिग्री दी गई है। राजू रहम की भीख मांगता रहा लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। बेहोश होने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। यह घटना मानवाधिकार आयोग का उल्लंघन है। पुलिस की कार्य प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। आयोग टीम का गठन करके पीड़ित के बयान कराकर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराए।
वह रहम की गुहार लगाता रहा, लेकिन पुलिसकर्मियों का दिल नहीं पसीजा
राजू ने बताया कि उसे रातभर पीटा गया। चीखने पर उसके मुंह में कपड़ा तक ठूंस दिया गया। वह रहम की गुहार लगाता रहा, लेकिन पुलिसकर्मियों का दिल नहीं पसीजा। बीच-बीच में थाना प्रभारी भी पूछताछ के लिए कमरे में आते रहे। राजू के अनुसार लकड़ी के चार व एक प्लास्टिक का डंडा पुलिसकर्मियों ने पीटते-पीटते तोड़ दिया। उसके बेहोश होने और पैरों में सूजन आने पर पुलिसकर्मी अस्पताल लाए।











