-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। कमला नगर थाना पुलिस ने फरवरी में पिंकी उर्फ प्रेमलता के गायब होने की शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। सिर्फ गुमशुदगी दर्ज कर इतिश्री कर ली जबकि पति और भाई के द्वारा साफ-साफ शिकायत की गई थी कि शेर सिंह और उसके कुछ साथियों ने उसको नशीला पदार्थ खिलाकर अपहरण कर लिया है। फिर भी पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की। शेर सिंह के भाइयों को पूछताछ करने के बाद छोड़ दिया गया। पति और भाई को आरोपियों को पकड़वाने के लिए काफी पापड़ बेलने पड़े, लेकिन दोनों ने ठान लिया था कि वह पिंकी को न्याय दिला कर ही मानेंगे। थाना पुलिस और अधिकारियों द्वारा कोई सुनवाई नहीं करने पर उन्हें कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज हो सका और हत्यारा पकड़ा जा सका। भाई और पति के द्वारा न्यायपालिका का धन्यवाद किया जा रहा है, जिसकी वजह से उनकी बहन का हत्यारोपी पकड़ा जा सका है।
बता दें कि चार फरवरी को कमला नगर की रहने वाली पिंकी उर्फ प्रेमलता गायब हो गई थी। पति मनीष ने पांच फरवरी को थाने में शिकायत की। पुलिस ने मामले में सिर्फ गुमशुदगी दर्ज की। इधर पति का बार-बार कहना था कि शेर सिंह अपने कुछ साथियों के साथ नशीला पदार्थ पिलाकर उसे बहला फुसला कर ले गया है। पति ने यह भी आशंका जाहिर की कि पिंकी की हत्या कर दी गई है। लेकिन थाना पुलिस ने कोई भी सुनवाई नहीं की। पति और भाई पुलिस अधिकारियों के पास भी चक्कर काटते रहे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। 14 अप्रैल को उन्होंने अधिकारियों को पत्र लिखा लेकिन उस पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद पति मनीष ने न्यायालय में मुकदमा दर्ज कराने के लिए प्रार्थना पत्र डाला। न्यायालय के आदेश पर 10 मई को अपहरण की धारा में शेर सिंह सहित कई लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने जब जांच शुरू की तो सामने आया कि शेर सिंह ने ही पिंकी की हत्या कर उसका शव यमुना किनारे दफना दिया है। इसके बाद पानीपत में पति और भाई की मदद से फैक्ट्री मालिक ने शेर सिंह की गिरफ्तारी कराई। वहां से पुलिस उसे ले आई है। सवाल यह खड़े हो रहे हैं कि आखिर पुलिस ने शुरुआत से ही पति और भाई की शिकायत को गंभीरता से क्यों नहीं लिया? शासन से बार-बार निर्देश आ रहे हैं कि महिला संबंधी अपराधों को गंभीरता से लिया जाए। फिर भी आगरा पुलिस उन्हें गंभीरता से क्यों नहीं ले रही है? अगर पुलिस शुरुआत से ही पति और भाई की बात मान लेती तो इस मामले का खुलासा काफी पहले ही हो जाता। इधर बताया यह भी जा रहा है कि हत्यारोपी को पकड़वाने में पति और भाई ने काफी मेहनत की है। पुलिस के हाथ जोड़ जोड़ कर उन्हें दबिश में ले गए हैं।
भाई पंकज बोला दबिश में एक लाख रूपया खर्च किया है
आगरा। मृतका के भाई पंकज का डीएलए से बातचीत में कहना है कि शुरुआत से ही पुलिस की लापरवाही सामने आई थी। वह लगातार थाना पुलिस को बता रहे थे कि शेर सिंह ने उनकी बहन को अगवा किया है और उसकी हत्या कर दी है लेकिन कोई भी सुनवाई नहीं की जा रही थी। कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज होने के बाद दरोगा सुमित नागर के द्वारा दबिश में उनका करीब एक लाख रुपया खर्च करा दिया गया। वह इधर उधर से पैसा एकत्र कर पुलिस को देते रहे। इधर पुलिस उन्हें जिस स्थान पर ले जाती थी वह लोकेशन हत्यारोपी की दो दिन पहले की होती थी। भाई पंकज ने बताया कि पानीपत में हत्यारोपी एक फैक्ट्री में काम कर रहा था, उन्होंने फैक्ट्री मालिक से हाथ जोड़कर निवेदन किया कि वे उसे पकड़वा दें। फैक्ट्री मालिक ने उसे पकड़कर थाने में बंद करा दिया। इसके बाद कमला नगर पुलिस वहां से उसे लेकर आई है। पंकज ने यह भी बताया कि हत्यारोपी शेर सिंह के पास सात आधार कार्ड हैं उसका असली नाम किसी को नहीं पता है। भाई पंकज का कहना है कि उन्होंने मुख्यमंत्री को भी ट्वीट कर आगरा कमिश्नरेट पुलिस की लापरवाही को उजागर किया है।
आखिर यह कैसी पुलिसिंग हो रही थानों में, पर्यवेक्षण पर भी सवाल
आगरा। आखिर थानों में लापरवाही वाली पुलिसिंग क्यों हो रही है? यह किसी के समझ नहीं आ रहा है। पुलिस अगर पीड़ितों की सुनवाई करने में रुचि ले तो काफी हद तक लोगों को उसमें मदद मिलेगी। आलम यह है कि पुलिस कमिश्नर और पुलिस अपर आयुक्त के पास रोजाना करीब 200 फरियादी पहुंच रहे हैं। पुलिस कमिश्नर के द्वारा एक एक फरियादी के लिए फोन किया जाता है। पुलिस कमिश्नर और पुलिस अपर आयुक्त पीड़ितों को लेकर गंभीर हैं लेकिन थाना पुलिस नहीं। जगदीशपुरा में भी एक युवती ने आत्महत्या कर ली। साढ़े चार महीने तक दरोगा उसके बयान ही नहीं करा सका। अब कमला नगर में मृतका के पति और भाई को न्याय के लिए न्यायालय तक दौड़ना पड़ा। तब जाकर हत्यारोपी की गिरफ्तारी हुई।
रिश्वत लेने में दो महीने में यह पुलिस कर्मी हो चुके सस्पेंड
पिछले कुछ महीनों में पुलिस पर लगातार दाग लग रहे हैं। रिश्वत के मामलों में अब तक ये पुलिसकर्मी निलंबित हो चुके हैं, लेकिन इनके खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है—
एसआई देवव्रत पांडे थाना सिकंदरा
एसआई गौरव राठी थाना सिकंदरा
एसआई नीरज कुमार थाना सिकंदरा
कांस्टेबल रवि थाना सिकंदरा
कांस्टेबल सोनू थाना लोहामंडी
एसआई राजकुमार थाना बासोनी
कांस्टेबल गुरप्रीत बासोनी
कांस्टेबल सुनील कुमार बासोनी
कांस्टेबल सुनील बासोनी











