आगरा। आगरा के उद्योगों, कारीगरों और नागरिकों पर वर्षों से मंडरा रहे टीटीजेड (टीटीजेड) प्रतिबंधों के संकट को लेकर डेवलपमेंट काउंसिल ऑफ फुटवियर एंड लेदर इंडस्ट्रीज़ के चेयरमैन पूरन डावर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक महत्वपूर्ण प्रतिवेदन दिया। इसमें टीटीज़ेड नीतियों की गलत व्याख्या, सुप्रीम कोर्ट में चार दशक से लंबित मामले की वजह से उद्योगों और आजीविका पर पड़ रहे गहरे असर की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा गया है कि आधुनिक रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम को अपनाने की तत्काल आवश्यकता है। आगरा का औद्योगिक भविष्य तभी सुरक्षित हो सकता है, जब टीटीज़ेड ढांचे की वैज्ञानिक समीक्षा, स्पष्ट नीति और तकनीक-आधारित समाधान लागू हों।
श्री डावर ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया है कि पर्यावरण संरक्षण सभी की साझा जिम्मेदारी है। लेकिन टीटीजेड के नाम पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की वर्षों से गलत व्याख्या और गलत क्रियान्वयन किया गया है। इसके परिणामस्वरूप उद्योगों पर अनावश्यक रोक, नई इकाइयों को अनुमोदन में बाधा, निवेश में गिरावट और बड़े पैमाने पर रोजगार हानि जैसी स्थिति ने आगरा की औद्योगिक रीढ़ कमजोर कर दी है। कुछ स्वार्थी तत्वों ने टीटीज़ेड के प्रावधानों का दुरुपयोग औद्योगिक गतिविधियों को रोकने के हथियार की तरह किया, जो कानून व संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है।
काम के मौलिक अधिकार पर चोट: 40 वर्ष से लंबित वाद का दुष्प्रभाव
डेवलपमेंट काउंसिल ऑफ फुटवियर एंड लेदर इंडस्ट्रीज़ के चेयरमैन ने स्पष्ट कहा कि एमसी मेहता वाद, जो 1984 से सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है, ने आगरा के हजारों उद्योगों को नियमों की अनिश्चितता के साये में धकेल दिया है। अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत काम–व्यवसाय के मूल अधिकार पर इसका सीधा असर पड़ा है। कठोर प्रतिबंध और अस्पष्ट नीतियां एमएसएमई, फुटवियर व लैदर इकाइयों और लाखों श्रमिकों के लिए असुरक्षा, आर्थिक कठिनाई और भविष्य को लेकर गहरी चिंता का कारण बन रही हैं।
ऑडिट आधारित व्यवस्था की जगह आधुनिक तकनीक अपनाने की जरूरत
ज्ञापन में कहा गया है कि आज विश्व भर में औद्योगिक उत्सर्जन पर नियंत्रण के लिए रियल-टाइम उत्सर्जन मॉनिटरिंग, आईओटी (IoT) सेंसर, डिजिटल लॉग, एआई आधारित अलर्ट, ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है। आगरा के उद्योग इस पूरी प्रणाली को 24×7 लागू करने को तैयार हैं। सरकारी पोर्टल से डेटा एकीकरण और सतत उत्सर्जन ट्रैकिंग पूरी तरह संभव है। उन्होंने कहा कि कंबल-नुमा प्रतिबंध समाधान नहीं, बल्कि आधुनिक मॉनिटरिंग ही वास्तविक पर्यावरणीय न्याय है।
व्यापक नीति-समीक्षा की मांग: छह प्रमुख सुझाव
ज्ञापन में टीटीजेड की वैज्ञानिक समीक्षा की तात्कालिक आवश्यकता बताते हुए छह प्रमुख सुझाव दिए गए हैं। ये हैं- कंबल-नुमा प्रतिबंध हटाकर रियल-टाइम मॉनिटरिंग लागू की जाए। मनमाने प्रतिबंध समाप्त कर स्थिर व स्पष्ट नीति जारी हो। सभी निर्णय वास्तविक उत्सर्जन डेटा पर आधारित हों। पर्यावरण नियम नागरिकों और उद्योगों के संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप बनाए जाएं। टीटीज़ेड प्रावधानों के दुरुपयोग की जांच और रोकथाम की जाए। 1984 से लंबित मामले के समाधान हेतु उच्च-स्तरीय नीति हस्तक्षेप हो।











