आगरा। शुक्रवार को एसीपी हरीपर्वत की कोर्ट में छह जमानती फर्जी निकलने से खलबली मच गई। यह तीन आरोपियों की जमानत देने आए थे। सभी के खिलाफ रकाबगंज थाने में धोखाधड़ी की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया है।
पूर्व में खुलासा हो चुका है दीवानी में एनडीपीएस सहित कई गभीर मामलों में फर्जी जमानती जमानत दे रहे थे। जांच में पता चला था कि इस खेल में अधिवक्ता भी शामिल थे। जमानतियों का सत्यापन थाने पहुंचता ही नहीं था। फर्जी मुहर लगाकर जमानत के कागज कोर्ट में पेश कर दिए जाते थे। इस संबंध में पूर्व में कई मुकदमे लिखाए गए थे। कमिश्नरेट बनने के बाद शांतिभंग के मामले में एसीपी कोर्ट में पेश किए जाते हैं। गुरुवार को कोतवाली थाने से गिर्राज उनके बेटे विकास और शिवम को पुलिस ने शांतिभंग में चालान करके एसीपी हरीपर्वत मयंक तिवारी की कोर्ट में पेश किया था। एसीपी हरीपर्वत मयंक तिवारी ने बताया कि वह प्रत्येक जमानती से यह जरूर पूछते हैं कि आरोपित को कैसे जानते हो। उसे उसकी गारंटी पर छोड़ा जा रहा है। अगर आरोपित ने दोबारा कोई घटना की तो वह भी इसका जिम्मेदार होगा। कोतवाली वाले मामले में जब जमानती उनके सामने आए तो उन्होंने पहला सवाल यही पूछा कि आरोपित कौन है। उसका नाम और पिता का नाम क्या है। उसे कैसे जानते हो। जमानती सकपका गए। उनके पास कोई जवाब नहीं था। भागने का प्रयास किया। पुलिस ने उन्हें दबोच लिया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि सभी छह जमानती फर्जी हैं। उन्हें पैसा देकर लाया गया था। पुलिस ने गांव पुर्रा गोवर्धन, खंदौली निवासी कोमल सिंह, जितेंद्र, रमेश चंद्र (एत्मादुद्दौला), जय कुमार मनोज कुमार, अनेक सिंह (फतेहाबाद) को पकड़ लिया।











