आगरा। मोटरसाइकिल चोरी का एक महीने तक मुकदमा दर्ज नहीं होने को लेकर पीड़ित थाना पुलिस से इतना हताश हो गया कि वह थाने के बाहर खड़ा होकर वीडियो बनाने लगा और उसमें अपनी पीड़ा व्यक्त करने लगा। यह बात प्रभारी को बुरी लग गई और उन्होंने उसे उठाकर बंद कर दिया। पीड़ित का कहना है कि वह बाद में वीडियो वायरल ना कर दे इसके लिए उसके फोन में से उसकी पत्नी के साथ जो अंतरंग फोटो थे वह ले लिए और कहा कि अगर किसी से शिकायत की तो फोटो वायरल कर दूंगा। इसके साथ ही आरोप है कि 60 हजार भी उससे ले लिए। इसके बाद उसे छोड़ा गया।
वीडियो एक थाने के बाहर का है। पीड़ित ने बताया कि एफआईआर दर्ज करना तो दूर उससे बात भी सही तरीके से नहीं की गई। इसके बाद थाने के बाहर खड़े होकर वह वीडियो बनाने लगा। वीडियो में वह बोल रहा है 12 जून को उसकी मोटरसाइकिल चोरी हुई थी। इसकी रिपोर्ट कराने के लिए वह थाने के एक महीने से चक्कर लगा रहा है। थाना पुलिस द्वारा कोई भी सुनवाई नहीं की जा रही है। वह एक महीने से अपना काम छोड़कर चक्कर लगा रहा है। अगर गाड़ी से कोई वारदात हो जाती है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। पीड़ित ने बताया कि वीडियो बनाते समय थाना प्रभारी की उस पर निगाह पड़ गई और उन्होंने उसे पकड़ लिया। इसके बाद उसका उत्पीड़न किया, उसे बंद कर दिया। जब उसे छुड़ाने के लिए उसकी पत्नी आई तो पत्नी से लिखवा कर लिया की पति उनके साथ अभद्र व्यवहार करता है। इसके बाद दोनों का राजीनामा करा दिया गया और छोड़ने के नाम पर 60 हजार ले लिए। यह भी कहा गया कि अगर किसी को बताया तो फोटो वायरल कर दिए जाएंगे। पीड़ित किसी भी अधिकारी से शिकायत करने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहा है। क्योंकि वह सिस्टम को देखकर काफी दुखी है। वह और उसकी पत्नी काफी तनाव में है। पीड़ित का कहना है कि मामला तो बहुत बड़ा है लेकिन मैं इतना सक्षम भी नहीं हूं कि पुलिस से लड़ सकूं। पीड़ित का कहना है कि वीडियो बनाने पर थाना प्रभारी ने गुस्से में आकर उसके साथ ऐसा किया है। अपने बचाव के लिए मेरी पत्नी की तरफ से शिकायत ले ली। पत्नी पर दबाव डाला और कहा कि उसके पति को जेल भेज देंगे। तुम बदनाम हो जाओगे। इधर मोबाइल का पूरा डाटा और अंतरंग फोटो व वीडियो ले लिए। शनिवार देर रात मामला सुर्खियों में आने के बाद एक अधिकारी के कहने पर देर रात मोटरसाइकिल चोरी की एफआईआर दर्ज हुई है। मामले में प्रभारी से बात की गई तो उनका कहना है कि पैसे के लगाए गए आरोप झूठे हैं। पीड़ित की मोटरसाइकिल चोरी की रिपोर्ट क्यों नहीं लिखी गई इसका उनके पास जवाब नहीं था। इससे उनकी कार्यशैली सवालों के घेरे में छाई हुई है।










