आगरा। पनवारी कांड में आगरा की एससी एसटी कोर्ट से जेल गए 35 लोगों की हाईकोर्ट से जमानत हो गई है। जेल में ऑर्डर आते ही सभी की रिहाई होगी। विधायक चौधरी बाबूलाल के द्वारा हाईकोर्ट में जमानत के लिए पैरवी की गई थी।
21 जून 1990 को सिकंदरा के गांव पनवारी में भरत सिंह कर्दम की बहन मुंद्रा की बारात आनी थी। जाट बाहुल्य इस गांव में दबंगों ने बारात चढ़ने का विरोध किया। इस पर बवाल मच गया। जाट और जाटवों के बीच खूनी संघर्ष हुआ। तमाम लोगों की जानें चली गईं। सबसे ज्यादा नुकसान जाटव समाज के लोगों का हुआ था। आसपास के इलाकों के जाटों ने जाटवों के गांवों पर हमला बोल दिया। भरतपुर से भी जाट आगरा पहुंच गए थे। दंगा भड़कने से तत्कालीन जिलाधिकारी आगरा अमल कुमार वर्मा और एसएसपी कर्मवीर सिंह ने गांव में बैठकें कीं। जाटों ने अधिकारियों और नेताओं के सामने ही उपद्रव मचा दिया था। पुलिस को गोली चलाकर गांव से भागना पड़ा था। करीब 10 दिनों तक गांव में कर्फ्यू लगा रहा था। मुकदमा विचारण के दौरान 22 लोगों की मृत्यु हो गई थी। 30 मई को 35 दोषियों को एससी-एसटी कोर्ट ने पांच साल का कठोर कारावास का दंड सुनाया था। यह सभी जेल में बंद थे। हाई कोर्ट से जमानत के लिए विधायक चौधरी बाबूलाल के द्वारा पैरवी की जा रही थी। विधायक चौधरी बाबूलाल ने बताया कि गुरुवार को सभी की जमानत हो गई है।











